Author: sumit jain

अंकुर फूटेगा एक दिन पुनः

इस निराश से भरे जीवन में अशान्त से भरे मन में अनुभूति है सुख-दुःख जन्म-मरण के चक्र में मानव की मानवता खो गई है कदाचित भीड़ में अंकुर फूटेगा …

Naye Saal Ki

नए साल की पहली किरण बेरंग निशा के तिमिर को चीरती हुई देदीप्यमान कर देगी जीवन के नविन सफर को तेज होगई है धड़कन मच गई है हलचल चारो …

Email Ki Relampel

ये युग है डिजिटल का ऑनलाइन है संसार इन्टरनेट है मुल्क ईमेल है एड्रेस हमारा जोड़ दिया सब से क्या उपलब्धि पाई……. आया ईमेल निराला मच गया कोहराम बच्चे-युवा हुए दीवाने हर …