Author: Sukhbir95

ख्वाब

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम …

सपने

सपने देखा करो ओह यारों सपने साकार भी होते हैं। आज हम जिस मंजिल पर हैं कईओ के ख़्वाब ही होते हैं। बैठे बिठाए नहीं मिलती मंजिल मेहनत करने …

चाहत

शांति चाहता था मैं पर शांति ढूंढ न पाया। ऐकता चाहता था मैं पर ऐकता रख न पाया। समानता चाहता था मैं पर जात पात को मिटा न पाया। …