Author: Sukhbir95

यादें

बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते। वापस नहीं हो सकती एक बार जुबान से निकली हुई बाते। नहीं भूली जा सकती अपनों के साथ हुई मुलाकातें। “सुखबीर” …

क्यों लड़ता झगड़ता है तू

क्यों लड़ता झगड़ता है तू क्यों एक दूसरे से बैर रखता है तू। क्यों इंसान होकर इंसान से ही इतनी दुश्मनी पालता है। कभी लड़ाई धर्म के नाम पर …

वजूद

आंखों की यह पलकें झपका के तो दिखा सच बताऊ यह भी ना कर पाएगा। उस परमात्मा के कारण ही तेरा वजूद है उसके बिना, मिट्टी में मिल जाएगा। …

ख्वाब

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम …

सपने

सपने देखा करो ओह यारों सपने साकार भी होते हैं। आज हम जिस मंजिल पर हैं कईओ के ख़्वाब ही होते हैं। बैठे बिठाए नहीं मिलती मंजिल मेहनत करने …

चाहत

शांति चाहता था मैं पर शांति ढूंढ न पाया। ऐकता चाहता था मैं पर ऐकता रख न पाया। समानता चाहता था मैं पर जात पात को मिटा न पाया। …