Author: siv prasad verma

करती है सरकार भैया।

करती है सरकार भईया।। आजकल व्यापार भईया।। इन्हें तो बस वोट चाहिए। देश का बंठाधार भईया।। गुंडे मवाली छुटभैयों से संसद है लाचार भईया। किसे पड़ी है सच बोलेगा …

अपने हालत पे यूँ लाचार हो गए हैं

अपने  हालत  पे  यूँ लाचार  हो गए  हैं ।। आम  थे  कभी, आचार हो गए  हैं।। अपनी आजादी पे किसकी नज़र लगी प्यारे उम्र भर के लिए गिरफतार हो गए हैं ।। भूख लगी हमने तो  रोटी क्या मांग ली, उनकी निगाहों में गुनहगार हो गए हैं ।। वो  देने  आया था दर्देदिल का दवा हमें सुना है इन दिनों बीमार हो गया  हैं।। सुना है कुछ बेईमान लोगों ने कैसे , कुछ जोड़ तोड़ की है ओर सरकार हो गए है ।।  दुवा  मांगी थी कभी खुशियों की मैंने उसी दिन से मेरे हाथ बेकार हो गए है।।

आदमी है तो जिंदगी में जरुर बीकता है !

कभी जनता, कभी सरकार बीकता है  ! कभी कुर्सी , कभी दरबार बीकता है  ! हर चीज है यहाँ बिकाऊ दोस्तों ; कोई छुप कर कोई सरेबाजार बीकता है  !   …