Author: Shishir "Madhukar"

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

वो केवल मुस्कुराते हैं-शिशिर मधुकर

मुहब्बत करके जो मझधार में संग छोड़ जाते हैं लाख चाहा किया भूलें वो फिर भी याद आते हैं अगर बनता है हर इंसान केवल एक मिट्टी से कहो …

मुझे पैग़ाम मिल जाता है – शिशिर मधुकर

मुझसे बात करके तुम जो इतना खिलखिलाती हो अरे जज़्बात अपनी प्रीत के नाहक छुपाती हो तुम्हारा रूप वो मुझको सदा बेचैन करता है शर्म से पल्लू का कोना …

नज़र मिलती है जब तुमसे – शिशिर मधुकर

नज़र मिलती है जब तुमसे तो तुम धीरे से हँसते हो गुमां होता है ना तुमको तुम्हीं इस दिल में बसते हो नशा होता है कुछ ऐसा मुहब्बत का …

किस काम की सांसें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत छोड़ दी तुमने– मेरा सुख चैन खोया है बचे ना अब तो आंसू भी ये मनवा इतना रोया है हर तरफ आग नफरत की मेरा तन मन जलाती …

निशां तो फिर भी रहते हैं – शिशिर मधुकर

भले ही घाव भर जाएं निशां तो फिर भी रहते हैं मुहब्बत के गमों को आज हम तन्हा ही सहते हैं वो पत्थर हैं ज़माने से कभी कुछ भी …

नई शुरुआत करते हैं – शिशिर मधुकर

भले ही मुद्दतों से हम ना तुमसे बात करते हैं तेरे ख़्वाबों में ही लेकिन बसर दिन रात करते हैं ये माना बाग़ उजड़ा है बहारें अब ना आती …

मिलन की आस – शिशिर मधुकर

अब मेरी ये बेरुखी ना तुमको रास आएगी अपने प्रणय की हर घड़ी तुमको सताएगी तन्हाइयों में जब कभी मन बेचैन सा होगा मुझसे मिलन की आस ही तुमको …

अगर जो साथ मिल जाए – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की खुशबू ना कभी जीवन में भूलूँगा तेरे रुखसार की लाली को अधरों से मैं छू लूँगा अगर जो साथ मिल जाए मुझे तेरी मुहब्बत का मैं …

तुमने जब डोर ना थामी – शिशिर मधुकर

तुमने जब डोर ना थामी मुझे तो दूर जाना था ज़माने भर की रुसवाई से तुमको बचाना था भले ही लाख दुख सहता रहूँ मैं अपने सीने पे तुमसे …

कली ये प्रेम की – शिशिर मधुकर

रिश्तों की खातिर अक्सर मुहब्बत छूट जाती है अगर कमज़ोर हो धागा तो माला टूट जाती है कोई भी जान कर इस खेल में शामिल नहीं होता कली ये …

ज़िन्दगी तेरी राहों में – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ढूँढी पुतलों में तो बस धोखे मिलें मुझको ज़िंदगी कैसे कह दूँ मेहरबान आखिर बता तुझको चले बस सच की राहों पे तो देखो कुछ ना पाया है …

चुप से रहते हैं – शिशिर मधुकर

हमेशा बोलने वाले हम आज चुप से रहते हैं तुम्हें कैसे बताएं दिल में कितनी पीर सहते हैं हमें तो मिल के लूटा है यहाँ पे ख़ास अपनों ने …

यादों के चिराग़ – दीप्ति गोयल

महकता है ये तन मेरा जब भी ख़्याल आता है जेहन में तेरा दूर रहकर भी ना टूटे तुझसे मन का वो नाता है मेरा। गुज़रेगा वक्त बदलेंगे हम …

लकीर – शिशिर मधुकर

आधी अधूरी चाहत यहाँ बस पीर देती है बेबसी में डूबी हुई अक्सर तकदीर देती है ज़िन्दगी जिसके निकट तन्हा सी रहती है ना मिटने वाली वो तो एक …

घावों की पीड़ा – शिशिर मधुकर

हर तरफ़ आग नफ़रत की यहाँ मुझको जलाती है मेरी रूह चैन पाने को ही तो बस तुझको बुलाती है इस कदर मुझको तोड़ा है ज़माने भर में अपनों …

राहत नहीं होती – शिशिर मधुकर

बदल जाए समय के संग जो चाहत नहीं होती तन्हा रहना पड़े जीवन में तो राहत नहीं होती काश उनसे उल्फ़त की हम आदत बदल पाते ये रूह इस …

गर्म लावा जो बहता है- शिशिर मधुकर

तेरे दीदार को दिल हर घड़ी बेताब रहता है तू खुश रहे हरदम खुदा से बस ये कहता है संग तन्हाई के जीना कभी आसां नहीं होता पीड़ा बिछड़ने …

दोस्त – शिशिर मधुकर

बुरे वक्त में भी जो तुम्हारा साथ ना छोड़े और राहों से हटा दे सब मुश्किल भरे रोड़े किस्मत से मिलता है जीवन में ऐसा दोस्त ऐसे रिश्ते को …

विश्वास पूरा है – शिशिर मधुकर

भले तुम दूर हो मुझसे मगर विश्वास पूरा है तेरे बिन ये सपनों का जहाँ एकदम अधूरा है सुरक्षा तेरी हस्ती की सदा नज़दीक रहती है किसी भी आँख …

मुहब्बत और भरोसा- शिशिर मधुकर

मुहब्बत में दीवाने जन…जिस घड़ी बात करते हैं प्रणय के देवता तब…फूलों की बरसात करते हैं किसी के मन में बस जाए छवि जो कोई हौले से बसर उसके …