Author: Shishir "Madhukar"

अंदाज़ ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

सब कुछ लुटा के प्यार से मुझको ही लूटा है अंदाज़ ए मुहब्बत ये तेरा बिल्कुल अनूठा है शीशा ए दिल में पहले तो तेरी एक छवि थी छवियां …

बेचैनियां – शिशिर मधुकर

बेचैनियां घटती नहीं और दिल उदास है दूर है मेरी ज़िंदगी अब आती ना पास है मुद्दत हुईं आगोश में जो उसके सर रखा आज भी छूटी नहीं मिलने …

काल जीवन का – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे न संग उसने निभाया है अब तलक काल जीवन का ये मैंने तन्हा बिताया है सभी बस छल गए मुझको लुटा बैठा हूँ मैं अब …

सुकूं पाने की खातिर- शिशिर मधुकर

लाख चेहरे नज़र के सामने दुनियाँ में आते हैं एक जलवे तेरे हमको यहाँ लेकिन सताते हैं बड़ी उलझन सी होती है तू जैसे दूर रहता है मुहब्बत करने …

धूप देखो तो ना खिली – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ की ग़ज़ल )

लाख ढूंढा किया फिर भी मुहब्बत मुझको ना मिली रात गुजरी है दिन निकला धूप देखो तो ना खिली घाव देता रहा जो भी मिला उल्फ़त की राहों में …

तुम्हें गर याद ना कर लूँ – शिशिर मधुकर

तुम्हें गर याद ना कर लूँ मुझे न चैन आता है दर्द सीने में उठता है मुझे हर पल सताता है देख के मेरी हालत को वो कई तंज़ …

अगर तुम पास रहते हो – शिशिर मधुकर

अगर तुम पास रहते हो मुझे खुशबू सी आती है तेरे दिल की तमन्ना जो मुझे खुल कर बताती है अगर तुम दूर रहते हो तन्हाई मुझको डसती है …

सीने से लगा मुझको – शिशिर मधुकर

वो मेरे पास आया था दे गया पर दगा मुझको मुहब्बत में हर इंसा नें हमेशा ही ठगा मुझको वो मेरे साथ रहता है मगर मेरा नहीं दिखता ढूंढने …

निशान ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

दूरियां मुझको अब तुम जताने लगे हो अपना संग वो अनोखा भुलाने लगे हो तड़प कोई मिलने की दिखती नहीं अब खुद को महफिल से मेरी बचाने लगे हो …

मुझको भी ये एहसास हुआ – शिशिर मधुकर

तुम मेरे दिल में बसते हो मुझको भी ये एहसास हुआ दूजा देखा नज़दीक तेरे मुझे दर्द बहुत ही खास हुआ कुछ दूर हुए थे हम दोनों मौसम नें …

मेरी परवाज़ बन गए – शिशिर मधुकर

दुनिया से भिड़ गए मेरी आवाज़ बन गए प्यारे सनम तुम मन का मेरे राज़ बन गए खुद को भुला मैं जब तेरे आगोश में गिरी ऐ हमनवा तुम …

जिम्मेदारी – शिशिर मधुकर

अमृतसर में उजडा दशहरे का मेला कैसा ये खेल देखो कुदरत नें खेला नज़र सावधानी से थोड़ी जो हट गई रेल कीं पटरी फिर लाशों से पट गई देखी …

ये एहसान तेरा है – शिशिर मधुकर

कहाँ जाएं मिलें किस से बड़ी मुश्किल ने घेरा है मुझे अपनों नें क्या लूटा कोई दिखता ना मेरा है मुझे रिश्तों में जकडा है मगर ना प्यार बरसाया …

मिला ना वो मगर अब तक – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस को होती है वो तो नज़दीक आता है खुद की हस्ती को साथी के लिए जड़ से मिटाता है जो रिश्ता निभाता है फ़कत एक आस के …

सैलाब की नीयत – शिशिर मधुकर

मैं तन्हा हूँ राह साथी की जाने कब से तकता हूँ फना होती हैं उम्मीदें ग़म का मारा सा थकता हूँ मेरी आँखों में आंसू तो नज़र ना आएंगे …

टूटने की भी सीमा है – शिशिर मधुकर

मन की बात खुलकर के जहाँ पे कह नहीं सकते ऐसे हालातों में इंसान कभी खुश रह नहीं सकते तेरे नज़दीक आते हैं तो फ़कत रुसवा ही होते हैं …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की …