Author: Shishir "Madhukar"

अबके बरस होली में-शिशिर मधुकर

अबके बरस होली में घोल नशा बोली में प्यार से बुला ले मुझे अंग तू लगा ले सजन रंग लगी चोली में कलियों पे भंवरे मचल रहे अरमान मेरे …

घाव तन्हाई का- शिशिर मधुकर

मुहब्बत का सुकूँ सबको कहाँ जीवन में मिलता हैं चमन पा लेने भर से तो ना उसमें फूल खिलता हैं उमंगे मर चुकी जिनकी और जहाँ जोश ठण्डा हो …

मुसीबत – शिशिर मधुकर

मुहब्बत भी करना बना अब मुसीबत नाराज़ होता है जिसको भी चाहो छुआ तो नहीं देखो मैंने किसी को ख़ता क्या है मेरी तुम ही बताओ खिला है अगर …

इश्क की दौलत – शिशिर मधुकर

बड़े हो मुझसे तुम थोड़े मगर मैं तो ना डरती हूँ तुम्हारी हर अदा को ए सनम मैं प्यार करती हूँ तुम्हारे नाम की बिंदी और ये माँग में …

मुहब्बत का सूरज- शिशिर मधुकर

ना तुम साथ में हो ना खुशबू तुम्हारी ये जीवन कहो अब कैसे कटेगा मुहब्बत का सूरज जो छुप सा गया है अँधेरा ये मन का कैसे छंटेगा प्यार …

मेरा मन तर नहीं होता – शिशिर मधुकर

अगर दीवानगी होती तो फिर ये डर नहीं होता तुम भी तन्हा नहीं रहते सूना ये घर नहीं होता मैं तो मुद्दत से प्यासा हूँ आस बारिश की रखता …

वक्त का क्या पता – शिशिर मधुकर

जवानी सबकी ढल जाएगी ज्यों ही शाम आएगी तेरे इस रूप की मय देख फिर ना काम आएगी महल इतना भी ऊँचा ना बना अपनी हिफाजत को ज़िन्दगी जीने …

मेरा सहारा – शिशिर मधुकर

तेरी आवाज़ ही अब तो बनी मेरा सहारा है हजारों फूल खिलते हैं तूने जब भी पुकारा है तू मेरी सांस बनके इस तरह जीवन में छाया है तेरे …

लाचारी – शिशिर मधुकर

मिलन की आरजू पे डर ज़माने का जो भारी है तेरी मेरी मुहब्बत में अजब सी कुछ लाचारी है दोस्तों दोस्ती मुझको तो बस टुकडों में मिल पाई बड़ी …

मेरी फितरत – शिशिर मधुकर

मुझे तू प्यार करता है तो मैं सिमटी सी जाती हूँ खुशी से झूम उठती हूँ लाज संग मुस्कुराती हूँ मेरे मन में उमंगों का बड़ा सा ज्वार उठता …

पीड़ा की लहरें – शिशिर मधुकर

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे है सोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगा जेहादी …

पास हो तुम – शिशिर मधुकर

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँ जिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँ अविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब …