Author: Shishir "Madhukar"

सुकून जो दिल को देते हैं – शिशिर मधुकर

बढ़ाओ हाथ कि अब रातें मेरी तन्हा ना कटती हैं मिली हैं जितनी भी सांसें हल्के हल्के सिमटती हैं एक सी ऋतु रहेगी तो कभी ना ये डाल महकेंगी …

तुमको मालूम तो होगा – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से मैंने ज़िन्दगी में तुमको पाया था वरना तन्हाइयों में मेरे संग बस मेरा ही साया था ना कोई साथ था मेरे तन भी घावों से छलनी …

मशहूर ना रहते – शिशिर मधुकर

गर मेरी तरह तुम भी तड़पते फिर दूर ना रहते भुला सब कुछ नशे में ज़िन्दगी के चूर ना रहते अगर तुम ठान लेते साथ मुझको भी निभाना है …

परचम जज्बातों का – शिशिर मधुकर

तुम सामने पड़े तो ये मन खुशियों से भर गया ढलका हुआ तेरा चेहरा भी थोड़ा निखर गया खुशियाँ मिली थी एक तरफ़ मायूसी कम नहीं गुल वो खिला …

मुझसे जीया नहीं जाता – शिशिर मधुकर

तेरे बिन इस ज़माने में मुझसे जीया नहीं जाता ज़हर का घूंट तन्हाई का भी ये पीया नहीं जाता लाख चाहा मगर ये घाव दिल के रिसते जाते हैं …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पाया तुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पाया हवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

गैर हम हो नहीं सकते – शिशिर मधुकर

कोई परदा नहीं जब बीच गैर हम हो नहीं सकते किसी और की बाहों में अब तुम सो नहीं सकते बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दौलतें प्रेम की जग …

भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता है तेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता है कितना भी कोई संयम रख …

जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए …

तेरी मुस्कान का जादू – शिशिर मधुकर

समां वो याद है मुझको जो तुम आँखों में भरते थे बड़े नज़दीक आ कर के अपनों सी बात करते थे मुहब्बत किस से हो जाए नहीं कोई नियम …

जनसंख्या विस्फोट – शिशिर मधुकर

जनसंख्या विस्फोट है एक वोट का सारा खेल भारत का इसके कारण ही निकल रहा है तेल जाहिल जनता आँखें मूंदे भार बढ़ाती जाती है और अधिक भारत भूमि …

बिना तेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर जो ली तुमसे कहो अब मैं रुकूं कैसे फ़कत डर कर ज़माने से कहो अब मैं झुकूं कैसे बिना तेरे मेरे जीवन में कोई खुशियां ना रहती …

मुकद्दर से सदा हारा – शिशिर मधुकर

मिलन की आग अब जलती नहीं है तेरे सीने में मुझे भी अब नहीं इच्छा लबों का जाम पीने में ज़माने ने मेरा पत्थर के माफिक रूप देखा है …

थक गया हूँ – शिशिर मधुकर

थक गया हूँ अब मैं तेरे इंतज़ार में वीरानी सी छा गई है मेरे दयार में नाराज़ होके मैंने जो भी तुझे कहा जुबान अब नही है मेरे इख्तियार …

किसी को फर्क क्या – शिशिर मधुकर

मुहब्बत इंसान की इंसान से जब टूट जाती है लाख कोशिश करो ये कभी वापस न आती है तूने घायल किया मैंने तेरे से प्यार जब माँगा मेरे दिल …

बड़ा गहरा समुन्दर है – शिशिर मधुकर

तुम्हें तो पा लिया मैंने अब तो बस चैन पाना है किसी भी हाल मे ये साथ तो हरदम निभाना है बड़ी जालिम है ये दुनिया ढूंढ़ती रहती है …