Author: Shishir "Madhukar"

खता मेरी ना थी कोई – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमसे खता मेरी ना थी कोई खुदा ने चाहा जो इस जहाँ में होता है वो ही नहीं होता है सबके भाग में प्यार का मिलना …

नज़रों की मय – शिशिर मधुकर

पाक ज्वाला मुहब्बत की जब सीनों में दहकती है एक दूजे की सांसों में फिर घनी खुशबू महकती है नशा होता है तब ऐसा किसी की नज़रों की मय …

एक रैन मिल जाए – शिशिर मधुकर

तू बाहों में अगर भर ले मुझे तो चैन मिल जाए बड़े नज़दीक से तेरे नैनॊं से मेरे नैन मिल जाए बड़ी तन्हा सी गुजरी है अब तलक जिंदगी …

दिल टूटने का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारा हाथ क्या पकड़ा ज़माना भर खफा हुआ ना मुहब्बत मिली मुझको ना ही कोई नफ़ा हुआ यूँ तो पहले भी मेरी ज़िन्दगी में रब ना था कोई मगर …

मैल असली – शिशिर मधुकर

तूफानों में ही रिश्तों की ताकत का पता चलता है आवरण धुलने पर मैल असली बाहर निकलता है छुपी गन्दगी दिलों की जब दो आँखों के सामने हो मजबूरी …

मुस्कान फिर भी आए – शिशिर मधुकर

मुसीबत में जां फँसी हो पर मुस्कान फिर भी आए काश ऐसी मुहब्बत मुझको इस जहाँ में मिल जाए कुछ पाने या खोने से कोई सुख दुःख तब ना …

ये नज़रें ना हिलती हैं- शिशिर मधुकर

चाहे कुछ भी मिले मुझको जो खुशी तुझसे मिलती है ऐसा लगता है ज्यों मानो जूही की कलियाँ खिलती है मिलन दिल का किसी से जब रब की मर्ज़ी …

जाएँ फिर कहाँ – शिशिर मधुकर

रिश्तों में जब धोखा मिले तो जाएँ फिर कहाँ निज हाथों में खंजर लिए व्यक्ति बैठा है यहाँ दिल से दिल के मेल बना करते हैं जिस जगह अब …

इसका मलाल है – शिशिर मधुकर

समझा मुझे ना कोई बस इक इसका मलाल है क्या मेरा भी इस जहान में किसी को ख़याल है तन्हा चला सफर में सदा किसी साथ के बिना ज़िन्दा …

कामों का बँटवारा – शिशिर मधुकर

प्रिय मित्रो अक्सर स्त्री विमर्श की रचनाओं में मैंने पुरुष के वर्चस्ववादी समाज को एक षड्यंत्र के रूप में निरूपित होते देखा है. जबकि मेरे विचार में स्त्री के …

वो बीज फिर भी खिल गया – शिशिर मधुकर

मैंने पानी दिया ना खाद वो मेरी मिट्टी में मिल गया उड़कर कहीं से आया वो बीज फिर भी खिल गया जिसको मैं सींचता रहा घर में खुद से …

बंजर संवर गया – शिशिर मधुकर

किस्मत ना हुई साथ मैं तो जिधर गया टकरा के सूखी चट्टान से मैं बिखर गया वो दूसरे हैं वक्त ने जिन पे करम किया प्यार की बारिश में …

सदा दूरियां रहीं – शिशिर मधुकर

तेरे ख़याल बिन मेरे जीवन में कुछ नहीं याद आती हैं वो बातें जो तूने मुझे कहीं कैसे अजीब खेल हैं ज़िन्दगी में पर यहाँ दिल के करीब लोगों …

तेरा जो साथ मिलता – शिशिर मधुकर

तेरा चेहरा जो दिख जाता वहीँ बरसात हो जाती बिना बोले ही नज़रो से दिलों की बात हो जाती अगर तुम चाँद के जैसा खुद का श्रृंगार कर लेते …