Author: Shishir "Madhukar"

स्नेह धागा – शिशिर मधुकर

सुन बात धोबी की प्रभु ने सिय को त्यागा था माता के जीवन में ये पल कितना अभागा था मुश्किलें कितनी भी आईं वो नैहर नहीं लौटी प्रभु सम्मान …

शिव कहाता है – शिशिर मधुकर

मेरा अपमान करने वाले तू ये भूल जाता है इज्जत उतारने का गुर मुझको भी आता है मगर बिष को ग्रहण करना आसां नहीं होता इसको पी लेने वाला …

मेरे दुश्मन – शिशिर मधुकर

मेरे दुश्मन मैं तुझको ये साफ़ पैग़ाम देता हूँ तेरी हरकत के कारण ही तुझे ये नाम देता हूँ तुझसे निपटने के मुझ पे भी इंतज़ाम हैं सारे मगर …

मशीनों से बनो – शिशिर मधुकर

मशीनी युग में जीते हो मशीनों से बनो तुम भी कमानों से वो चलती हैं कमानों से चलो तुम भी मशीनें दिल नहीं रखतीं वो चलती हैं या रुकती …

भोर भी होगी – शिशिर मधुकर

घायल है मेरा मन किसे दिखलाऊँ चोटों को मैं सारी उम्र तरसा हूँ प्रेम के प्यासे होठों को अपना समझ के मैंने जिसे घर में बसाया था मेरे सम्मान …

सर झुका लिया – शिशिर मधुकर

संयम का नया सोपान देखो हमने पा लिया तुम सामने खड़े थे फिर भी मुँह घुमा लिया कच्ची नहीँ है प्रीत जो बारिशों में टूट जाएगी यादों में जल …

ज़माना कहता है – शिशिर मधुकर

तुम्हे देखा है सुबह शाम ज़माना कहता है तेरी खातिर हुआ बदनाम ज़माना कहता है बड़ा काबिल था मैं एक दिन सबकी निगाहों में मगर मुझको नहीं अब काम …

रात की खामोशियां – शिशिर मधुकर

गुजर रहा है वक्त यादें धुंधली पड़ रही है तन्हाई की ज़ंजीरें फिर से जकड़ रही हैं रोशनी अब तो नज़र आती नहीं कहीं से रात की खामोशियां मुझको …

कैसे भुला दें हम – शिशिर मधुकर

दिल तुम से लग गया है कैसे भुला दें हम अरमान जो जग गए है कैसे सुला दें हम लाखों जतन किए हैं यहाँ तुमको हँसाने में कैसे खुद …

उनको मनाइये – शिशिर मधुकर

रूठे हुए जनाब हैं उनको मनाइये टूटे हुए से ख्वाब हैं उनको मनाइये ऐसी ना कोई बात है इतने खफा हैं वो आँखों में आफताब है उनको मनाइये सज …

शिकवे किसे कहूँ – शिशिर मधुकर

मुझको तुम्हारे प्यार ने फिर से जिला दिया तेरा करम हुआ मुझे अमृत पिला दिया उजड़े थे मुहब्बत की राहों में जब चले किस्मत ने मुझे तुमसे लेकिन मिला …

इश्क की लगन – शिशिर मधुकर

चेहरे में जिनके देख लो एक बार तुम खुदा वो अपने ज़िन्दगी में कभी होते नहीं जुदा कोशिश करी हैं लाख मैंने निशानियां मिटे हर अंग में नाम उसका …

प्रेम की ज्वाला – शिशिर मधुकर

किसी ने दर्द अपना ढेर सा शब्दों में कह डाला किसी को ग़म छुपाने में मदद करती है ये हाला किसी ने सिल लिए लब सच जग से छुपाने …

अश्रु बरसते हैं – शिशिर मधुकर

किसी से दूर होकर भी हम तो मन में बसते है किसी के साथ रहकर वो सदा तन्हा तरसते हैं किसी का दिल दुखा प्रेम को तुम पाओगे कैसे …