Author: Shishir "Madhukar"

जाने ये किसका दोष है – शिशिर मधुकर

ढूंढ़ते हैं हम जहाँ पे ज़िन्दगी मिलती नहीं जाने ये किसका दोष है कलियां अब खिलती नहीं पत्तियां इस पेड़ की खामोश हैं मायूस हैं जब हवा ही ना …

तुमने मुझको छांटा था-शिशिर मधुकर

बचपन में ना जाने मुझको कितना तुमने डांटा था गलती मैं जब करता था गालों पर पड़ता चांटा था सबने पूछा जब तुमसे चुन लो एक सुन्दर सा बच्चा …

माँ की गोद बिछौना- शिशिर मधुकर

हर बच्चा अपनी माता की आँखों का नूर सलौना है उसके प्रेम के आगे जग का हर स्नेह कितना बौना है कैसी भी पीड़ा हो लेकिन नींद जहाँ आ …

तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं …

जो साथ कोई देता रहे – शिशिर मधुकर

साथ रहता है जो हरदम सगा नहीं होता वरना मुझको भी यूँ उसने ठगा नहीं होता नैन में स्वप्न लिए नींद भी आ जाती थी वरना तन्हा पड़ा मैं …

कोई तो झांक कर देखे – शिशिर मधुकर

अधिक पाने की चाहत में यहाँ थोड़ा भी खोया है वही काटा है इंसा नें जो निज हाथों से बोया है स्वप्न जब टूटते हैं आँखों में आंसू नही …

मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा …

गुल ना खिलाते हो – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से तुम अब अपनी नज़रें ना मिलाते हो कली ही नोच देते हो कभी गुल ना खिलाते हो कभी सुख देने की खातिर भरा था चेहरा हाथों …

जो प्रेम करते हैं – शिशिर मधुकर

आज भी बातों से उनकी फूल झरते हैं दिल से जुदा होते नहीं जो प्रेम करते हैं ढल गई है रात देखो दिन निकलने को रोशनी से इसमें चलो …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

अधूरे से – शिशिर मधुकर

अधूरे से दिखे मुझको तुम्हें कल शाम को देखा बिना सिय के तड़पते जैसे अकेले राम को देखा सभी गोपी कृष्ण को घेर कर उल्लास करती थी मगर राधा …

आईने की छवि- शिशिर मधुकर

मुहब्बत ग़र समझता वो तो यूँ रूठा नहीं होता अलि के चूम लेने से फूल झूठा नहीं होता ना संग जाएगा कुछ तेरे ना संग जाएगा कुछ मेरे समझता …

मुहब्बत का सरूर – शिशिर मधुकर

देख के मन लगे गर किसी को पाने में हो गई उस से मुहब्बत तुम्हें ज़माने में अकेले तुम रहोगे बीच में जो लोगों के तन्हा खुद को नहीं …

घटाएं प्यार की- शिशिर मधुकर

प्यार जब दिल में होता है तो आँखों से झलकता है यार ग़र सामने हो सांसों में शोला दहकता है मुहब्बत ज़िन्दगी में फूलों की खुशबू के जैसी है …

सभी मतलब के रिश्ते हैं – शिशिर मधुकर

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंने ग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंने मुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगी ना जाने क्या …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …