Author: Shishir "Madhukar"

मिलन बेहद ज़रूरी है – शिशिर मधुकर

तेरे बिन कलम चलती नहीं कविता अधूरी है तेरी खामोशी कुछ ऐसी है ये होती ना पूरी है प्रकृति बिन पुरुष बिखरा हुआ बेचैन रहता है उसको आधार देने …

बात छोटी सी – शिशिर मधुकर

जब तकरार में अधिकार हो ना हो परायापन बातें बुरी लगती नहीं तब लगता है केवल मन जिनको समझ आ जाती है ये बात छोटी सी रिश्तों का असली …

आँखें नहीं रोईं – शिशिर मधुकर

मुझको ना थी दरकार एक तेरे सिवा कोई तेरे बिन तन्हा रातों में मेरी नींदें भी हैं खोईं सबको कह सकता नहीं ये ग़म भी ऐसा है दिल दुखता …

कहाँ मुस्कान आएगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस जगह ना हो कहाँ मुस्कान आएगी घृणा की आग एक दिन पूरे घर को ही जलाएगी लाख कोशिश करो महके ये गुलिस्ता ए जिन्दगी काग़ज़ के फूलों …

कितने अजीब – शिशिर मधुकर

कितने अजीब इस ज़िन्दगी के ये खेल हैं सारे इंसानी बस्तियों में रिश्ते भी बड़े बेमेल है सारे जिन्हें अपना समझ हम सभी को छोड़ देते हैं अक्सर वो …

एहसास – शिशिर मधुकर

जहाँ गुलाब हों कांटों का तो वास होता है शैतान भी अक्सर खुशबू के साथ सोता है केवल फूल ही ईश्वर के मुकुट में सजते हैं शूलों को क्यूँ …

प्रेम का बीज – शिशिर मधुकर

समाजों में जो रहते हैं प्रेम फिर हो नहीं सकता इतने बंधनों को इसके संग कोई ढो नहीं सकता प्रेम का बीज फलने को स्वार्थ मुक्ति ज़रूरी है मोह …

कैसे कैसे मोड़ – शिशिर मधुकर

जिन्दगी कैसे कैसे मोड़ तू जीवन में लाती है नज़र के सामने है जिन्दगी पर ना मिलाती है बिन कारण तो जीवन में ना कुछ भी होता है कौन …

दिव्य प्रेम – शिशिर मधुकर

प्रेम जब दिव्य होता है तो अपनी सुध नहीं होती लोग बन जाते हैं ऐसे में परस्पर नैनॊं की ज्योति अहं रिश्तों में ऐसे पूरे जड़ से चकनाचूर होता …

अकेले – शिशिर मधुकर

ना होगी बात खुद को मेरी नज़रों से बचा लोगे पर इस दिल में छुपी मेरी सूरत कैसे निकालोगे सफ़र में सोचा था मिलकर करेंगे दूर सब काँटे अकेले …

अँधेरों में जो रहते हैं – शिशिर मधुकर

वो पौधे नहीं फलते अँधेरों में जो रहते हैं कई लोग जीवन में वक्त ऐसा है कहते हैं कोई माली जो न रोपे उन्हें नर्म सी धूप में बिन …

ज़िन्दगी का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारे ग़म को समझा है तभी तो ख्याल आया है किसी ने किस कदर आखिर तेरा दिल दुखाया है क्या करें ज़िन्दगी का खेल ये सब है ही कुछ …

कैसे कोई शह दे – शिशिर मधुकर

मुझे रुसवा किया है जिंदगी क्या चाहती है कह दें कुटिल लोगों के संग मैं जी सकूं शक्ति मुझे वह दे जिसे हीरा समझ कर मैंने निज सीने से …

तेरी यादों के साये – शिशिर मधुकर

गरम लू के थपेड़े भी बदन को ना जलाते हैं तेरी उल्फ़त के नगमों को जब भी हम गुनगुनाते हैं तू हँसती है तो लाखो फूल मिलकर खुशबू देते …

मुझे था प्यार फूलों से – शिशिर मधुकर

मुझे था प्यार फूलों से पर अपनाया बबूलों को जिंदगी से निकालूँ अब मैं कैसे इतने शूलों को वक्त के सामने मैं अपने मस्तक को झुकाता हूँ विनय है …

माफ़ कर देना –शिशिर मधुकर

तुम्हारा दिल दुखाया है मुझको तुम माफ कर देना शक और शुबहा मन से सकल तुम साफ़ कर देना मैं अंतस तक छलनी हूँ अपने ही लोगों के वारों …

समय बलशाली होता है – शिशिर मधुकर

समय बलशाली होता है नहीं रहता ये हरदम साथ ना छोड़ो मुफलिसी में तुम कभी भी दोस्तों के हाथ चलेँगी आँधियां तो कोई भी ना इनको रोक पाएगा जमीं …

मुहब्बत दिल में हो तो -शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में हो तो दिल की बातें जान जाते हैं तेरे चेहरे से ग़म और खुशियाँ सब पहचान जाते है तू हमसे लाख चाहे ना मिले और ना …

असल पैगाम – शिशिर मधुकर

जिन आँखों में मुहब्बत का नशीला जाम मिलता है उन्हीं सीनों से लगने में ही तो आराम मिलता है जुबां का क्या करोगे झूठ वो तो कह ही सकती …

मुहब्बत जो मिली होती – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जो मिली होती हाल ए दिल ये नहीं होता तंहाइयो में यूँ ग़मज़दा हो के फिर मैं भी नहीं रोता कोई रास्ता मिलता मुझे जो सहरा में सम्भलने …

क्यूँ अपनी जां निसार करता है- शिशिर मधुकर

बड़ा दर्द होता है जब कोई शब्दों से वार करता है तेरे मेरे स्नेह का एक ओछा सा तिरस्कार करता है जो इंसान की वक़त को निपट रुपयों से …