Author: शुभाष

हम तो करेंगे

हम तो करेंगे गुनह करेंगे पुनह करेंगे। वजह नहीं बेवजह करेंगे। कल से ही लो कलह करेंगे। जज़्बातों को जिबह करेंगे निर्लज्जों से निबह करेंगे सुलगाने को सुलह करेंगे। …

पोल-खोलक यंत्र

ठोकर खाकर हमने जैसे ही यंत्र को उठाया, मस्तक में शूं-शूं की ध्वनि हुई कुछ घरघराया। झटके से गरदन घुमाई, पत्नी को देखा अब यंत्र से पत्नी की आवाज़ …

तो क्या यहीं?

तलब होती है बावली, क्योंकि रहती है उतावली। बौड़म जी ने सिगरेट ख़रीदी एक जनरल स्टोर से, और फ़ौरन लगा ली मुँह के छोर से। ख़ुशी में गुनगुनाने लगे, …

जंगल गाथा

पानी से निकलकर मगरमच्छ किनारे पर आया, इशारे से बंदर को बुलाया. बंदर गुर्राया- खों खों, क्यों, तुम्हारी नजर में तो मेरा कलेजा है? मगर्मच्छ बोला- नहीं नहीं, तुम्हारी …

गुनह करेंगे

हम तो करेंगे गुनह करेंगे पुनह करेंगे। वजह नहीं बेवजह करेंगे। कल से ही लो कलह करेंगे। जज़्बातों को जिबह करेंगे निर्लज्जों से निबह करेंगे सुलगाने को सुलह करेंगे। …

कामना

सुदूर कामना सारी ऊर्जाएं सारी क्षमताएं खोने पर, यानि कि बहुत बहुत बहुत बूढ़ा होने पर, एक दिन चाहूंगा कि तू मर जाए। (इसलिए नहीं बताया कि तू डर …

आलपिन कांड

बंधुओ, उस बढ़ई ने चक्कू तो ख़ैर नहीं लगाया पर आलपिनें लगाने से बाज़ नहीं आया। ऊपर चिकनी-चिकनी रैक्सीन अंदर ढेर सारे आलपीन। तैयार कुर्सी नेताजी से पहले दफ़्तर …

बिल्लियॉ

ख़ूबसूरत पंखों वाली नन्हीं चिडियों को एक पिंजरें में क़ैद कर लिया था हमने , क्योंकि उनके सजीले पंख लुभाते थे हमको, इस पिंजरे में हर रोज़ दिए जाते …

यह कैसा घर ?

यह कैसा घर ? जहॉ बिस्तर पर उगी है नागफनी आंगन में घूमते हैं संपोले सोफे पर बिखरी हैं चींटियॉ, खूंटी पर टंगे हैं रिश्ते ,बालकनी में लटका है भरोसा, …

गुमशुदा की तलाश

गुमशुदा की तलाश गुमशुदा मुझे तलाश है रिश्तों की एक नदी की जो गुम हो गयी है कंक्रीट के उस जंगल में जहॉ स्वार्थ के भेडिये, कपट के तेंन्दुये, …

अस्मिता की नुमाइश

उस तूफानी रात जब बरस रहा था अहंकार और जाग उठा था रावण नई दिल्ली के रामलीला मैदान में क्रूर अट्टहासों के बीच अर्ध्यरात्रि में मैंने एक भटकती हुयी …