Author: shivdutt

तुम्हे पढ़ना नहीं आया

जिंदगी की क़िताब कुछ बिखरने सी लगी है बेचने की ख़ातिर इसे मुझे मढ़ना नहीं आया || लोग कहते है कि मुझे पत्थर गढ़ना नहीं आया तुम्हे क्या ख़ाक …

कब नीर बहेगा आँखों में ?

सागर कब सीमित होगा फिर से वो जीवित होगा आग जलेगी जब उसके अंदर प्रकाश फिर अपरिमित होगा || सूरज से आँख मिलाएगा कब तक झूमेगा रातों में ? …

कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को

कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को  कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय जितना भी कुछ भुलाने का दिन में प्रयास किया जाता है अनायास ही सब एक-एक कर मेरे सम्मुख …

बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता था सुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा हैं पहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ पर या शहर …

कैसे जान पाओगे मुझको

कैसे जान पाओगे मुझको अगर तुमने प्रेम नही किया तो कैसे जान पाओगे मुझकोकिसी को जी भरकर नही चाहा किसी के लिए नही बहाया आँखों से नीर  रात भर …

दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय जब भी भटकता हूँ किसी की तलाश में थक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास में तुम भी भटकती हो किसी की तलाश में ठहर जाती …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैं अनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैं कितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने की सच ही तो …

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब है दूजा कहे खुदा में सब है तीजा कहे चलो गुरुद्वारा चौथा कहे कहाँ और कब है मैं कहता माँ बाप की सेवा दुनिया …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्रा किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी, कुछ की उम्मीदे मुझसे विदा लेगी रूह जब मुस्करा कर मुझसे कितनी बार बुलाने पर भी जो रिश्ते नहीं आये दौड़ते चले आएंगे वो …

करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभो वासना से मुक्त हो मन,     हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥ वाणासुर को त्रिभुवन …