Author: shivdutt

कैसे जान पाओगे मुझको

कैसे जान पाओगे मुझको अगर तुमने प्रेम नही किया तो कैसे जान पाओगे मुझकोकिसी को जी भरकर नही चाहा किसी के लिए नही बहाया आँखों से नीर  रात भर …

दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय जब भी भटकता हूँ किसी की तलाश में थक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास में तुम भी भटकती हो किसी की तलाश में ठहर जाती …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैं अनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैं कितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने की सच ही तो …

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब है दूजा कहे खुदा में सब है तीजा कहे चलो गुरुद्वारा चौथा कहे कहाँ और कब है मैं कहता माँ बाप की सेवा दुनिया …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्रा किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी, कुछ की उम्मीदे मुझसे विदा लेगी रूह जब मुस्करा कर मुझसे कितनी बार बुलाने पर भी जो रिश्ते नहीं आये दौड़ते चले आएंगे वो …

करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभो वासना से मुक्त हो मन,     हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥ वाणासुर को त्रिभुवन …

क्या सचमुच शहर छोड़ दिया

अपने शहर से दूर हूँ, पर कभी-२ जब घर वापस जाता हूँ तो बहाना बनाकर तेरी गली से गुज़रता हूँ मै रुक जाता हूँ उसी पुराने जर्जर खंबे के …