Author: shivdutt

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब है दूजा कहे खुदा में सब है तीजा कहे चलो गुरुद्वारा चौथा कहे कहाँ और कब है मैं कहता माँ बाप की सेवा दुनिया …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्रा किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी, कुछ की उम्मीदे मुझसे विदा लेगी रूह जब मुस्करा कर मुझसे कितनी बार बुलाने पर भी जो रिश्ते नहीं आये दौड़ते चले आएंगे वो …

करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभो वासना से मुक्त हो मन,     हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥ वाणासुर को त्रिभुवन …

क्या सचमुच शहर छोड़ दिया

अपने शहर से दूर हूँ, पर कभी-२ जब घर वापस जाता हूँ तो बहाना बनाकर तेरी गली से गुज़रता हूँ मै रुक जाता हूँ उसी पुराने जर्जर खंबे के …

अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते

अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते जहाँ वालों को हम अपने, इशारो पर नाचा देते|| पहनते पाव मे सेंडल, लगते आँख मे काजल बनाते राहगीरो को, नज़र …

फ़ौज़ी का खत प्रेमिका के नाम

कितनी शांत सफेद पड़ी चहु ओर बर्फ की है चादर जैसे कि स्वभाव तुम्हारा करता है अपनो का आदर|| जिस हिम-शृंखला पर बैठा कितनी सुंदर ये जननी है| बहुत …

मैने तुम पर गीत लिखा है

एक नही सौ-२ है रिस्ते है रिस्तो की दुनियादारी, कौन है अपना कौन पराया जंजीरे लगती है सारी तोड़के दुनिया के सब बंधन तुमको अपना मीत लिखा है|| मैने …

क्यो कहते हो मुझे दूसरी औरत

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय मै गुमनाम रही, कभी बदनाम रही मुझसे हमेशा रूठी रही शोहरत, तुम्हारी पहली पसंद थी मै फिर क्यो कहते हो मुझे दूसरी औरत || ज़ुबान से …