Author: shakuntala tarar

गीत -संभावनाओं के स्वर -शकुंतला तरार

गीत-27-6 -2017 संवेदनाओं को अपने स्वर दीजिए भावनाओं को थोड़ा मुखर कीजिए || कोरी कल्पनाओं से नहीं बनती ये ज़िंदगी समस्याओं से घबरा के नहीं चलती ज़िंदगी उपेक्षाओं को …

गीत- सावन ने ली है अंगड़ाई -शकुंतला तरार

 गीत “सावन ने ली है अंगड़ाई” छम-छम-छम-छम स्नेह झर रहे सावन ने ली है अंगडाई, बादल के गजरे गुंथवाकर प्यासी धरती हरषाई || 1-अलकों में पलकों की छाया सांझ …

गीत – नेह का बंधन-शकुंतला तरार

गीत 17-05-17 नेह का बंधन अक्षर-अक्षर रात लिखी और, शब्द-शब्द से दिन निखरे | नेह का बंधन ऐसा बंधन, सुख-दुःख की छाया में पले, जोड़-जोड़ कर सुख संजोया, फिर …

गीत- “धडकनों का मिलन”-शकुंतला तरार

गीत-  “धडकनों का मिलन”- 17-05-17 धड़कनों का धड़कनों से जब मिलन होगा रात उजली और निखरती जाएगी || उँगलियों पर सात सुर जब सजते हैं बांसुरी पर राग जब …

गीत- जीवन है इक कौतुकी माया–शकुंतला तरार

“जीवन है इक कौतुकी माया” कब जागूं और कब सो जाऊं भेद कभी मन समझ न पाया जीवन है इक कौतुकी माया || कभी रात के सन्नाटे में बोल …

गीत-वृक्ष है जीवन, न हो प्रदूषण-शकुंतला तरार

गीत- “वृक्ष है जीवन, न हो प्रदूषण” वृक्ष है जीवन, न हो प्रदूषण, वृक्ष बिना जग सून है ताल तलैया पोखर नदिया, वृक्ष बिना सब सून है||   वृक्ष …

मुक्तक-सरहद के सिपाही-शकुंतला तरार

(सरहद के सिपाही,कमांडो ) कहीं जाड़ों में अकड़े भूखे प्यासे हर ख़ुशी देदी, जहां जन्मे हैं उस माटी को अपनी बंदगी देदी, क़यामत कितने आए व्यर्थ न होगी इनकी …

ग़ज़ल- उसकी गली में आना कैसा-शकुंतला तरार

ग़ज़ल—- उसकी गली में आना कैसा यूँ मन को बहलाना कैसा || यह जीवन है तन्हा तन्हा सोच सोच घबराना कैसा || साजिन्दे सब बैठे हैं पर देखो है …

ग़ज़ल- जान पाएगा तो कह देगा कहानी की वजह -शकुंतला तरार

ग़ज़ल— जान जाएगा तो कह देगा कहानी की वजह मेरे दिल पर तेरे ज़ख्मों की निशानी की वजह || मिलते हैं छुप-छुप के आशिक प्यार की आगोश में सुरमई …

ग़ज़ल -दर्द को तुम धता बता देना -शकुंतला तरार

दर्द को तुम धता बता देना बंदगी हो तो सर झुका देना || देख उपवन में खिलती कलियाँ मुझको धीरे से तुम सदा देना|| ज़िंदगी किसलिए उदास है तू …

“बस्तर की नारी” कविता -शकुंतला तरार

“बस्तर की नारी” अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पार्लर से निकली लिपी-पुती कुछ महिलाएं बड़े-बड़े आयोजनों का हिस्सा बनतीं मोमेंटो, कागज का सम्मान पत्र उपलब्धि के कुछ लाईन समाज …

मुक्तक-“”झुकी-झुकी सी नज़र”-शकुंतला तरार

“झुकी-झुकी सी नज़र” झुकी झुकी सी नज़र में कोई शरारत है ये प्यार का न भरम है यही इबादत है तुम्हारी इन अदाओं पे हैं लाखों कुरबां जो मार …

मुक्तक-“हवाओं के संग”-शकुंतला तरार

“हवाओं के संग” मैं हवाओं के संग संग उड़ती जाऊँगी मैं बहारों में फूल बनके मुस्कुराऊँगी जो डगमगाये क़दम देख लचकती डाली तुम्हें तुम्हारी नजर से चुरा के लाऊँगी …

मुक्तक-“इक दिन”-शकुंतला तरार

“इक दिन” खुशबू हूँ हवाओं में संवर जाऊँगी इक दिन ग़र साथ मिले तेरा निखर जाऊँगी इक दिन इस दिल को चुराने वाले ज़रा देख इधर भी बादल हूँ …

मुक्तक -“अदा”- शकुंतला तरार

“अदा” मुस्कुराने की अदा सीखी है फूलों से गुनगुनाने की सदा सीखी है भ्रमरों से इतरा रही हूँ बागे बहारों में शान से दिललगाने की खता कर ली है …

मुक्तक- “नारी”-शकुंतला तरार

“नारी” कभी कल्पना कभी सुनीता आसमान में उडती नारी माँ बहन बेटी बहु बन रिश्तों में निभती नारी अरमानों की बाँध पोटली खटती वह दिन रात बेबसी ग़मों की …

मुक्तक- ”नारी”-शकुंतला तरार

“नारी” प्रेरणा व संकल्प तुम्हीं हो पुरुषों की श्रेष्ठता व संघर्ष तुम्हीं हो पुरुषों की जन्मदात्री तुम धैर्यमयी तुम ओ नारी करुणा तेज त्याग तुम्हीं हो पुरुषों की || …

मुक्तक- “नारी”-शकुंतला तरार

“नारी” एक खूबसूरत एहसास है नारी इच्छाओं की प्यास है नारी जीवन के इस वातायन में प्यार भरा मधुमास है नारी || शकुंतला तरार रायपुर (छ.ग.)

कविता-“थानागुड़ी में”-शकुंतला तरार

बस्तर पर कविता ”थानागुड़ी में” चहल-पहल है आज थानागुड़ी में साहब जी आ रहे हैं रात यहीं विश्राम करेंगे नए-नए हैं तबादले पर आये हैं वे ! सुनते थे …

गीत-“छत्तीसगढ़ की माटी”-शकुंतला तरार

“छत्तीसगढ़ की माटी” सप्त ऋषियों की धरा ये पावन संस्कृतियों की थाती है प्रगति का सोपान जो गढ़ती छत्तीसगढ़ की माटी है धानी आँचल वाली मेरी छत्तीसगढ़ महतारी है …

मुक्तक-“ओस में भीगी इक सुबह” शकुंतला तरार

“ओस में भीगी इक सुबह” ओस में भीगी-भीगी सी इक सुबह ठण्ड में ठिठुरी जाती सी इक सुबह धूप का इक टुकड़ा उसे था डरा रहा ज़िंदगी ज्यूं गुनगुनाती …

मुक्तक-“मुस्कुराए” शकुंतला तरार

“मुस्कुराए” कभी मुस्कुरा के रोए कभी रो के मुस्कुराए, छलकती हुई आँखों की नमी धो के मुस्कुराए, कभी दास्ताने हसरत कहा था तुमने मुझसे, उन्हीं हसरतों के बीज मैंने …

गीत- मेरा हिन्दुस्तान- शकुंतला तरार

मेरा हिन्दुस्तान भोर सुनहरी लेकर जागा मेरा हिन्दुस्तान किरणों ने ली अंगड़ाई आजाद हिन्दुस्तान|| नई डगर है नया सफर है लगता सब कुछ नया नया आजादी की प्रभाती आई …

गीत-वन्दे मातरम्- शकुंतला तरार

वन्दे मातरम् तम को पराजित करने का बिहान वन्दे मातरम्। चहुं दिसि शोभित कलरव का जय गान वन्दे मातरम्।। शोषित पीड़ित मानवता थी बेबस और लाचार कुचल रही थी …