Author: Shabnam

तुम

तुम महज़ मेरी कविता नहीं हो यह कुछ जज्बात है मेरे तुम महज़ कागज़ पर सहायी की छाप नही हो यह कुछ खयालात है मेरे तुम्हे सोचकर लिखा गया …