Author: सीमा वर्मा

दर्द की किताब (16.12.2017)

खुशियों से नाराज है मेरी जिंदगी, जिंदगी की मोहताज है मेरी जिंदगी, लोगों को दिखाने के लिए हँसती हूँ मगर,दर्द की किताब है मेरी जिंदगी ॥ सीमा वर्मा”अपराजिता”

अपराजिता (06.01.2018)

हो रही है पराजित ये अपराजिता, जल रही है इसके अरमानो की चिता, हर दर्द जीतने को बेताब हो रहा है, हर सपना जैसे ख्वाब हो रहा है, मुस्कान …

दर्द और मुस्कान (08.11.2017)

देखते हैं ये दर्द मुझे कितना रुलाएगा, खुद हारेगा या मुझे हराएगा, आज फिर मेरी मुस्कुराहट और दर्द के बीच जंग जारी है , कभी दर्द मुस्कुराहट पर तो …

प्यार के सारे तुम एहसास दे देना ,,,,,

लगाकर गले से मुझको सनम प्यार के सारे तुम एहसास दे देना गा उठें मेरे दिल की धड़कनें सभी साँसों को मेरी तुम साज़ दे देना लगाकर गले से …

वादा है ये फिर मोहब्बत न होगी ,,,,,,,

तेरी ख़्वाहिशों से जुदा मेरी हसरत न होगी , वादा है ये फिर मोहब्बत न होगी , सजायेगा तू जिस तरह से मुझे कभी उससे अलग मेरी रंगत न …

माँ भारती के धानी परिधान के लिए,,,,,,,,

भारत की आन ,बान, शान के लिए इसकी स्वतंत्र पहचान के लिए शूली पे चढ़ गए वीर कितने माँ भारती के धानी परिधान के लिए माँ भारती के धानी …

उन्हें हम प्यार करते हैं,,,,,

झुकी हुई नज़रों से ये इज़हार करते हैं खुद से ज्यादा उन्हें हम प्यार करते हैं सुर्ख़ लबों पर कितने गुलाब खिल उठें चूमकर पेशानी जब वो इक़रार करते …

ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं,,,,

ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं , रहूँ सलामत मैं ,रब से ये इल्तिज़ा करते हैं, दर्द देती हैं उन्हें खामोशियाँ मेरी , हर आह को …

आवाज़ सिसकियों की दबी -दबी सी है,,,,,

आवाज़ सिसकियों की दबी -दबी सी है , हर वक़्त आँखों में अब नमी सी है , वक़्त अब तन्हां गुजरने लगा है हर लम्हें में तेरी ही कमी …

काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,

काली – स्याह सर्द रातों में तन्हाई में लिपटी तेरी यादों से गुमसुम -सी खामोश खड़ी मैं बातें करती तेरी बातों से काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,,,,,, बूँद …

मैं एक दीपक बन जाऊँगी,,,,,,,,,

अपने कलुषित अंतरतम में उज्ज्वल ज्योति जलाऊँगी ज्ञान की ओजस किरणों से मन का अंधकार मिटाऊँगी इस बार दीवाली पर खुद ही मैं एक दीपक बन जाऊँगी,,,,,,,, अम्बर से …

छुपा लिए हैं दिल के राज़ सभी,,,,,

पलकों की चिलमन तले छुपा लिए हैं दिल के राज़ सभी ग़म हो या ख़ुशी के पल हों मिले अब ज़ाहिर होते हैं नहीं कभी पलकों की चिलमन ,,,,,, …

हमारी हर बात याद रहेगी,,,

हम याद रहें न रहें हमारी हर बात याद रहेगी यक़ीन मानो हमारा ,अपनी हर मुलाक़ात याद रहेगी , जब करके दुनिया को नज़रंदाज़ मिलने पहुँची थी तुमसे करके …

करो प्रेम का तुम इक़रार,,,,,

मेरे साजन तुझ भी बिन देखो कैसे मैं कुम्हलाई हूँ रंग नहीं है मुझपर कोई बस काली एक परछाईं हूँ आकर मेरा रूप निखारो करो प्रेम से तुम श्रृंगार …

संकल्प

बेशक मेरी हार हुई है मंज़िल की इन राहों में फिर भी मैं जीतूंगी एक दिन है विश्वास निगाहों में … हर असफलता मुझे सफलता से दूर किन्तु मंज़िल …

जैसे हो सावन की प्रथम फुहार,,,

तेरे नैनो से छलक रही है तेरे प्रेम की रस -धार तन – मन मेरा भीग रहा है जैसे हो सावन की प्रथम फुहार,,, खुद को मैं भी जान …

तुम्हारे ही ख्यालों में खोई हुई थी,,,,

ये कुहासे की चादर में लिपटी हुई धरा और बादलों से घिरा हुआ अम्बर, ठण्ड में काँपता सारा जहां सूरज की एक किरण का इंतजार करता, इन सब बातों …

न जाने क्यों मेरे साजन तुम याद बहुत अब आते हो ,,,,,,,

न जाने क्यों मेरे साजन तुम याद बहुत अब आते हो बंद करूँ मैं आँखें तब भी तुम मुझको दिख जाते हो , न जाने क्यों,,,,,,, धड़कन में मेरी …

इंतज़ार तेरा,,,,

वो खामोश सी आहट तेरे क़दमों की , उम्मीदों की देहरी पर जाने कितने चिरागों को रोशन करती है , शाम का सूरज ढलते -ढलते उम्मीदों की किवाड़ के …

नूतन वर्ष

नूतन किरणें ,नूतन प्रभात ,है नूतन यह वर्ष , नूतन ऊर्जा,नूतन खुशियाँ ,है दिलों में नूतन हर्ष ,,,,,, बीत रहा जो साल है वो यादें बन जायेगा , आने …