Author: श्रीधर आचार्य ‘शील’

रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाओं सहित एक रचना

धर दिव्य-देह मानव का पुरूषोत्तम बनना होगा जिस पथ पर श्रीराम चले उस पथ पर चलना होगा मायावी इस दुनिया में छल-प्रपंच और कपट भरे जनता शोषित पीड़ित है …

जिन्दगी खुली किताब

जिन्दगी खुली किताब पढ़ रहे हैं लोग शब्द–शब्द हाशियों में गढ़ रहे हैं लोग | जिसके पृष्ठ–पृष्ठ पर लिखा ही दर्द है कल्पना में बात सोचना भी व्यर्थ है …