Author: Saviakna

कह दू…..””””””””””””’,,”””””””सविता वर्मा

तेरे एहसास की दौलत लेकर धनी हूँ मैं इन्हीं सतरंगी तेरे यादों से ही सनी हूँ मैं कहते हो, बडी़ खूबसूरत है तेरी आहट बिना तेरे एहसास, खुद को …

गृहिणी………..””””””””””””””””””सविता वर्मा

रूप में रागिनी, मै हूँ गृहस्वामिनी जो उठा लू कलम तो मैं गजगामिनी सार्थकता वही,अभिव्यक्ति भी वही जो तुम में प्रकृति,हममे शक्ति भी वही फिर किसलिए नही हमारी पहचान …

रोडलैंप””””””””सविता वर्मा

उस रोड लैंप की रोशनी में धुंधलके सा तुम्हारी परछाई का दिखना और मेरे हृदय का स्पन्दन आन्तरिक अह्लादित ह्रदय खुश्बू जैसे चंदन मन्त्र मुग्ध करता तुम्हारा सम्मोहन और …

रुसवाई में तुम “” “””””””सविता वर्मा

जगती आँखों के कोरो में सोती आँखों की अलसाई में तुम हममें हम नहीं से पर हमारी परछाई में तुम होठों से नाम लेते, जो होगी हमारी, रुसवाई में …

आँखों को सताती तुम्हारी आखें “” “”सविता वर्मा

क्या कहती हैं मुझसे तुम्हारी आखें क्या ढुढ़ती है मुझमें तुम्हारी आखें कुछ इशारा तो दो जिससे ये उलझन सुलझे कभी लगता है प्रश्न करती है तुम्हारी आखें कभी …

हर लब्ज ताजा””””””””सविता वर्मा

शाम का वक्त सुरमई मौसम सितम्बर का सितम तुम याद आये। रहते हैं शहर में मन है गवई ठेठ अल्हड़ मन में असंख्य संवेदनाएं।। हर लब्ज ताजा उबलते केतली …

शुरूर “” “”””””””””सविता वर्मा

चाँद को अपनी चाँदनी का जितना है शुरूर जादू करू ऐसा आप हमें भी चाहें उतना ही हुजूर उलझन…… वाली पहेली बना लुगी आप को सुलझाते रहोगे अपनी उलझन …

देखा है खुद को”” “”” “”””””सविता वर्मा

तेरे सार्थक शब्दो की बूनावट में आकाश में दिखती उपमाओ में आती जाती हवाओ में अक्षरो के रेशे रेशे में फूर्सत के हर छड़ो में उभरती हुई हर अक्स …

तेरी स्मृतियाँ”” “”””” “सविता वर्मा

ये चाँद,ये तारे,ये रतिया तुम्हारे बिन न बांहो का तकिया के तुमको ही ढूढती है बहिया। ये मेहदी,ये पायल,ये बिदियां तुम बिन नही कोई बतियां के तुमको ही ढूढती …

कुछ दिल की”””” “”””” सविता वर्मा

पेड़ के नीचे बैठे तुम निहारा करो ये इन्तजार जियादा था, ना कोई वादा ना कोई कसम फिर भी एतबार जियादा था रूक जाती थी कलम तुम्हे खत लिखने …

आयाम रचना है “” “”””” “” सविता वर्मा

क्षितिज का वह छोर जहां जाकर अंधेरा भी अनन्त रोशनी से लबालब हो जाये, ऐसा प्रकाश से भरा गधाशं रचना है। आजमाइश न हो खिलखिलाहटो की जब मेरी पंक्तियाँ …

यही है 15अगस्त””” “” ” “” सविता वर्मा

15 अगस्त आ तो रहा है धड़कन गुनगुना तो रहा है आकाश में तिरंगा लहरा तो रहा है व्यवसाय बन गया तिरंगा कचरे वाला फटा तिरंगा उठा तो रहा …

प्यार ही प्यार “” ” “” “””””””” सविता वर्मा

तुमसे मिलने वाली खुशी और प्यार को सम्भालना चाहतीं हूँ तुमसे हरदम मिलना और तुमको जानना चाहती हुँ कर दो दूर अपने शरम और अपने भरम को तुमसे प्यार …

स्वत्व की तलाश “” “” “””सविता वर्मा

संवेदनाओं की कसौटी पर कसती है जिन्दगी इस कसौटी पर कहाँ खरी उतरती है जिन्दगी। जिन्दगी के लय को सम्भाल कर चलने की कोशिश में सहज सरस कहाँ रह …

रंगीली सी “” “””” “” “” “” सविता वर्मा

ये कैसी सुबह है, जो खुबसूरत है पर लगती थोड़ी अधूरी सी मिल जाओ राहों में हो जाये थोड़ी पूरी सी सुरज की पौ फट जायेगी, चिड़िया चहचहा उठेगे …