Author: SARVESH KUMAR MARUT

ज़रूरतों के मुताबिक़

ज़रूरतों के मुताबिक़ ज़िन्दगी ज़िया करते हैं, ख़्वाहिशों के मुताबिक़ नहीं ज़िया करते हैं। ज़रूरतें तो ग़रीबों की भी पूरी हो जाती हैं, ख्वाहिशें, बादशाहों की भी अधूरी रह …

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है, सब के मन में बन्दियत तो है। कसर भी नहीं रही कुछ भी, इंसानियत ही तो मन में है। गुमांन करते फिरें शख़्स ख़ुद …

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी, ज़िन्दगी की हो गई। पर हमें रूसबा और बेख़बर कर गई। ज़िन्दगी की तलाश में घूमा यूँहीं। फ़िक्र मेरी और हद से बढ़ गई। सिलसिला चलता रहा राहों …

नभ खुली आँखों से देखे

नभ खुली आंखों से देखे, दुःखी दिख रहे हैं सारे। दूषित बसन यह कैसे छाय?, भीड़ लगाए पर सब हारे। शून्य का मन क्यों व्याकुल?, और आंखों में छाय …

ख़ामोशी

देखो कैसे याद दिलाती है?, उन बातों को ख़ामोशी। क्या हुआ था-क्या नहीं?, फ़िर यह कैसी मदहोशी? कुछ पूछे या कुछ बोले, तब क्या बतलाए ख़ामोशी? दुःख कैसा और …

प्यारी कोयल

प्यारी कोयल-प्यारी कोयल, तू इतना प्यारा कैसे गाती है? तू क्या खाती और क्या पीती?, तू मुझको क्यों नहीं बतलाती है? कू-कू ,कू-कू तेरी बोली, मन में मेरे घर …

ज़िन्दगी हमें झकझोरती रही

ज़िन्दगी हमें झकझोरती रही, फ़िक्र के फन्दों में उलझाती रही। सुन-अनसुने हालातों में डूबा, जो हमें डुबाते ही गये। किस्तियाँ भी बनीं जले बांसों की; और समंदर में कहाँ …

अब तो मचा है हाहाकार

अब तो मचा है हाहाकार, वृक्ष बिना बुरा हुआ है हाल। मानव ने यह किया कमाल, ख़ुद को पाएं नहीं सम्हाल। कैसे-कैसे अब किए हैं खेल?, हाल बुरा है …

आवारा भटकता फ़िर रहा हूँ

आवारा भटकता फिर रहा हूँ मैं, जाने क्यों उनकी यादों में। इस तरह यह ज़ीवन आधा गुजारा , आरज़ू भी करते हैं ,फरियाद करते हैं। मैं हूँ एक ऐसा …

वर्षा देखकर हर्षा दिल

वर्षा देखकर हर्षा दिल, रिमझिम-रिमझिम-हिलमिल हिल। प्यासी धरा अब हो उठी खिल, बिजली चमकी चिल-चिल-चिल। बच्चे दौड़े हिल मिल हिल, बच्चे गये तब सभी फिसल। मेढ़कों के अब बने …

फ़टी झोली और फ़टे हाल हैं

माँग लिया हमने कुछ उनसे, झट उन्होंने मुख अपना मोड़ा। तोड़ लिए अपने दरवाजे, टक-टकी लगाए मैंने देखा ऐसे। कुछ मिल जाए-कुछ मिल जाए , यह उम्मींद लगाए मैं …

सुबह का फ़रमान

सुबह का जब फ़रमान आता है, कुछ कसकसाते हैं, कुछ मसमसाते हैं। कुछ उठ जाते हैं , कुछ सिमटकर रह जाते हैं। कुछ इसका इस्तकेबाल करते हैं। कुछ तार-तार …

ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है

ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है, ग़म कितने हैं यह बता देती है। सह भी लेते हैं लोग अक्सर इसको, फिर भी अक्सर रुला देती है। फ़िक्र जब …

मैं पवन होता

मैं पवन होता तो, नदियों आकाश-पाताल तक उड़ता। तरु के पातों को स्पर्शित कर, मैं जन-जन को हर्षित करता। पहुँच यदि तरिणी तक, तो मृदु तरंगों के सह बहता। …

ओ! नन्हें बादल के टुकड़े

ओ! नन्हे बादल के टुकड़े,   ज़रा एक झलक दिखला जाना। देखो गर्मी पड़ी भयानक, आकर इसको टहला जाना। अम्बर बना है आग की थाली, अपने दोस्तों के साथ …

गुब्बारों का लगा है मेला

गुब्बारों का लगा है मेला। एक रुपए में ले लो जैसा। लाल,गुलाबी,नीला,पीला। पैसे लेकर दौड़ी शीला। माँग लिया गुब्बारा नीला। इधर से डोला- उधर से डोला। श्यामू,चिंटू,सीता,लीला। खेल सभी …

हे मातृभूमि! तेरी ख़ातिर

हे मातृभूमि! तेरी ख़ातिर,             लेकर यह अभियान चले। अपनी जान हथेली पर हम,             तुझ पर होने बलिदान चले। हम घट-घट के वासी हैं,             जो भी नज़र …

हर कोई वेगाना है

हर कोई वेग़ाना है, सभी का अपना अपना फ़साना है। उलझते जा रहे फ़ासलों क्यों? ये वन्दा कुछ दीवाना है। ज़िन्दगी जीना चाहते हैं, ख़्वाहिशों का आशियां है। रुक …