Author: Sajan Murarka

जिन्दगी

जिन्दगी के दस्तूर बड़े निर्जीव हसंता-रोता खेलता मौत के ठिकाने पहुंचने सजीव इसका तानाबाना यादों के धागों मे बुन थमा जाते कुछ दमकते चिराग जिस का असर अज़ीब रोशनी …

यादों का शिकार

असमंजस परिस्थिति-का एहसास, दिल में ये र्दद कब उठा ? कब शरीर का एक-एक हिस्सा, ज़मकर बेज़ान होने लगा? अब जख्मीं हालात मे; आगे धूप से तप्ते पल, पत्थरों …

मिलन

है आसमान मैं धरती मिलन प्यासी सदीयों से भ्रमित क्षितिज मे मिलन आश्वासित जितनी पास जाती तुम दूर हो जाते पर जब बरसाते स्नेह की धारा पल्लवित आशायें तुम …

प्यार के एहसास

सिमटी कोई लज़्ज़त- जैसे बाँहों में खामोशी से सीने में रंग भर दे, वैसे ही सहसा,बिन आहट, किसी ख़ास लम्हे को पिरोने रंगों मे हसरत मुहब्बत को सजाने लरज़ते …

पाती प्रेम की

शब्द शब्द हैं मुखर नेह अनुवादों की अक्षर अक्षर गमक रहा सुगंध देह की स्याही महकी यादों की फ़ैल गई सुरभि अन्तरमन की मन बहके खुशबु सोंधापन की सजल …