Author: rkhimanshu

बदलाव

 सूखे पत्तों को उड़ते देख ऋतु ने 
प्रश्न किया…. क्या तुम्हें मेरे साथ की इच्छा नहीं रही? पत्तों ने कहा…… हम तो 
बूढ़े, बेकार 
हो गए, सोचा, क्यों ना …

स्मृतियाँ

स्मृतियाँ चाँद को देख आँखें मूँदनी पड़ीं..
.. बिन बुलाए
 बेमौसम झरती फुहारों सी स्मृतियाँ जब उनकी चली आईं…. अश्रुओं की धार बहाती हृदय व्यथित करती इच्छाओं को तरंगित करती …

करो भोर का अभिनन्दन

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’   मत उदास हो मेरे मन करो भोर का अभिनन्दन ! काँटों का वन पार किया बस आगे है चन्दन-वन । बीती रात ,अँधेरा बीता करते …

ये खामोशियाँ

डॉ०भावना कुँअर ये खामोशियाँ डुबो गई मुझको दर्द से भरी गहन औ’ अँधेरी कोठरियों में। गूँजती ही रहती मेरी साँसों में प्यार-रंग में रंगी खुशबू भरी जानी पहचानी-सी बावरी …

अलाव

अलाव   तुमसे अलग होकर घर लौटने तक मन के अलाव पर आज फिर एक नयी कविता पकी है अकेलेपन की आँच से समझ नहीं पाती तुमसे तुम्हारे लिए …