Author: Rituraj Srivastava

हमारा भारत——ऋतुराज

तुंग शिखर पर दिव्य-आलोकित, भारत -भाल चमकता है जलधि जिसके चरण पखारे,वह विश्व-गुरू प्रणेता है जहां आंखों में ममता बसती है बांहो में कुटुंब समाता है संगीत जहां है …

वटवृक्ष………!—-ऋतुराज

आज याद आती है- पिताजी की वो बातें थकान और तनावग्रस्त आकर लंबी सांसे ले बिस्तर पर ऐसे बैठना जैसे- किसी परिंदे को मिला हो अपना बिछड़ा परिवार सुकून …

आज मैंने देखा है- ऋतुराज

आज मैंने देखा है- एक कली मुरझाई सी कैद स्वर्ण पिंजरे में थोड़ी क्षुब्ध थोड़ी शरमाई सी। आज मैंने देखा है- अंजन भरे लोचन से स्वप्नाश्रु झरते हैं अधरों …

प्रतीक्षा—–ऋतुराज

प्रतीक्षा है मेरे मन मे तेरे कदमों की आहट की बसा रखी है आॅखों में यादें मुस्कुराहट की प्रतीक्षा है मेरे मन मे तू वापस आयेगा लल्ला मेरे आंसू …