Author: Rinki Raut

अपनी भाषा

हिन्दी भाषा को बोलने में लज्जाते शर्म करते विदेशी बोली की गुलामी बजाते शरमाते वो तिरस्कार मिले उसे जो बोले हिंदी भाषा को गुलामी शौक अंग्रेजी बतियाते नाज़ करते …

प्रेम में मिलावट

प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था जब पेहली बार बचपन और यौवन के बीच हुआ धीरे-धीरे,जैसे-जैसे प्रेम को समझने की कोशिश की प्रेम में मिलावट घुलता गया प्रेम मिलावटी …

सरहद

जमीन पर एक लकीर खीची इन्सान चले अपने-अपने ओर एक ने कहा पाक जमीन दुसरे ने कहा भारत महान बैर दोनों ने पाला कुछ खास लोगो ने कभी नफरत …

लत

पीने से कोई सवाल हल नहीं होता और ना पीने से भी मेरा कोई सवाल हल नहीं हुआ पीते-पीते मैं पूरी रात पी गया रात का खोखलापन, शराब का …

किताबे

मेरे सिरहाने रहकर भी मुझसे रूठी है किताबे कुछ टेबल पर,कुछ पलंग नीचे जा छुपी आधी पढ़ी, आधी बाकी कोने में रखी किताबे हमेश पढ़ी जाने के इंतजार में …

आतंकवाद

कही किसी ने धर्म पर अपनी राय दी मानवता की मर्यादा को तोड़ता हुआ असंवेदनशील टिप्पणी कही किसी ने खेल खेला ऐसा शतरंज का खेल जिसे खेलता कोई है …

दर्द

गुलज़ार कहते है खुशी फूलझड़ी सी होती है रोशनी बिखरती झट से खत्म हो जाती है दर्द देर तक महकता है भीतर ही भीतर सुलगता है उसकी खुशबू जेहन …

रावण मरता क्यों नहीं?

बार-बार जलाने के बाद भी रावण साल दर साल विशालकाय और विकराल रूप धारण करता रहा ना रावण को जलानेवाला हारे ना ही रावण हारा सिलसिला सदियों तक चलता …