Author: RAKESH RATHI

जो रिश्ते थे बनाए……………राकेश राठी

जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। बेगाने तो बेगाने,अपने भी हुए पराये। धरती तो क्या, आसमान भी देख घबराये। जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये …