Author: राजेन्द्र यादव

अम्मा

चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा उसने खुद़ को खोकर मुझमें एक नया आकार लिया है, धरती अंबर …

कल की दुनिया हमको चाहिए

न तो बंदूक की, न ही बारूद की, कल की दुनिया हमको चाहिए नए रंगरूप की। जिसमें न पाठ पढ़ाया जाए नफ़रत का, जिसमें न राज चलाया जाए दहशत …

आशीर्वाद दीजो

छोटों के नमस्कार लीजो, नानी! हमको जी भर आशीर्वाद दीजो । आएँगे जब हम ननिहाल में, पूछेंगे-‘तुम हो किस हाल में?’ अपने सब हाल-चाल दीजो । नानी! हमको जी …

अम्माँ की रसोई में

हल्दी दहके, धनिया महके, अम्माँ की रसोई में । आन बिराजे हैं पंचायत में राई और जीरा । पता चले न यहाँ किसी को राजा कौन फकीरा । सिंहासन …

अपाहिज भोर होती है

ईंट पत्थर पर टिकी आराधना कमजोर होती है. जो दिखावे के लिए हो प्रार्थना वो शोर होती है. भीड़ का चेहरा नहीं होता कोई भी भीड़ के केवल हज़ारों …

अपने रहे न घने नीम के साए

धान पराया हुआ, हल्दी परायी, चढ़ गयी नीलामी पर अमराई ऐसी विदेसिया ने करी चतुराई. अपने रहे न घने नीम के साए गमलों में कांटे ही कांटे उगाये, पछुवा …

कौन देश माँ ?

चमके चंदा जहाँ तारे हज़ार, पवनिया बजाती जहाँ पर सितार, कौन देश माँ, बादलों के पार ? बिखराता कौन सुबह होते ही रंग ? बूँदों की सुनता है कौन जल-तरंग ? रोज़-रोज़ …

कर्म ही पूजा

कितना सारा काम करूँ मैं फिर भी गधा कहाता किससे कहूँ मैं पीड़ा अपनी किसे नियम बतलाता। लादो चाहे कितना बोझा चुपचाप लदवाता मैं भी करूँ आराम कभी तो …

मेरे घर आया मेहमान

मेरे घर आया मेहमान मानूँ मैं उनको भगवान रोज रोटियाँ दाल बनाते आज बने हैं पकवान। घर की बैठक को सजाया सबने अनुशासन अपनाया करते भाग-भाग कर पूरे उनके …

गाँधी बाबा आ जाओ तुम

गाँधी बाबा आ जाओ तुम सुन लो मेरी पुकार, भूल गए हैं यहाँ लोग सब, प्रेम, मोहब्बत प्यार । शांति, अमन और सत्य-अहिंसा पाठ कौन सिखलाए , समय नहीं …

गाँधी-शास्त्री

गाँधी-शास्त्री सबके प्यारे हम सबके हैं राज दुलारे । हम सब सीखें इनसे जीना, ये हैं सबकी आँख के तारे । संकट में ना ये घबराएँ सत्य अहिंसा हमें …

अकड़

अकड़-अकड़ कर क्यों चलते हो चूहे चिंटूराम, ग़र बिल्ली ने देख लिया तो करेगी काम तमाम, चूहा मुक्का तान कर बोला नहीं डरूंगा दादी मेरी भी अब हो गई …

खेत में बोवाई की कहावतें

(1) कन्या धान मीनै जौ। जहां चाहै तहंवै लौ।। {कन्या की संक्रान्ति होने पर धान (कुमारी) और मीन की संक्रान्ति होने पर जौ की फसल काटनी चाहिए।} (2) कुलिहर …

खेत में जोत की कहावतें

(1) गहिर न जोतै बोवै धान। सो घर कोठिला भरै किसान।। {गहरा न जोतकर धान बोने से उसकी पैदावार खूब होती है।} (2) गेहूं भवा काहें। असाढ़ के दुइ …

खेत में पैदावार की कहावतें

रोहिनी जो बरसै नहीं, बरसे जेठा मूर।  एक बूंद स्वाती पड़ै, लागै तीनिउ नूर।। {यदि रोहिनी में वर्षा न हो पर ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र बरस जाए तथा स्वाती …

वर्षा की कहावतें

(1) रोहिनी बरसै मृग तपै, कुछ कुछ अद्रा जाय। कहै घाघ सुने घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय।। {यदि रोहिणी बरसे, मृगशिरा तपै और आर्द्रा में साधारण वर्षा हो जाए …

सावन मास बहे पुरवइया।

(1) सावन मास बहे पुरवइया। बछवा बेच लेहु धेनु गइया।। (अर्थात् यदि सावन महीने में पुरवैया हवा बह रही हो तो अकाल पड़ने की संभावना है। किसानों को चाहिए …