Author: राहुल कुमार

नये पुष्प

चलते चलते इस राह पर, नये पग मिल जाएंगे जीवन में फिर तुम्हारे, नये पुष्प खिल जाएंगे जब मेहनत होगी साथ तुम्हारे, सफलता होगी हाथ तुम्हारे कामयाबी तुम्हारी देख, …

कौन हूँ मैं ?

गहरा तालाब हूँ मैं, उमड़ता सैलाब हूँ मैं खिलता फूल हूँ मैं, चुभता शूल हूँ मैं उगता सूरज हूँ मैं, लहराता ध्वज हूँ मैं तेज तलवार हूँ मैं, स्वर्ण अलंकार …

जब हम तुम मिलजाते हैं

हसदेते हो तुम अगर, फूल ये सब खिलजाते हैं तब फूल भी ये मुस्काते हैं, जब हम तुम मिलजाते हैं हवाएं चलने लगती हैं, फ़िज़ाएं बहने लगती हैं आकाश …