Author: Deo

फायदा

अभी तक तो तुम्हें भुलाया नहीं था मगर फिर ये सोचा याद कर के भी क्या फायदा ? जमाने में इतनी ताकत कहाँ थी जो तुम्हें मुझसे यूँ जुदा …

ऐ खुदा…..

ऐ खुदा तू ​​है कहाँ? मैं हूँ यहाँ, जहाँ उसने है मुझको दिया भुला जिसकी झील सी आँखों में मैंने था देखा जहा उसकी अनकही सदा को भी था …

पागल

हम तो दिवाने थे पागल तो दुनिया ने बताया क्या करते तेरी एक झलक ने मुझको इतना था बेबस बनाया । न राहों की खबर थी, न मंजिल का …

रूह

फिर रूह को आज तेरा एहसास हुआ है तेरी य़ादों की तूफा में खुद को बरबाद किया है । तेरी आँखों से बूंद भी गिरने देता नहीं तेरे होठों …