Author: Parmod Dubey

जिंदगी में मेरी तुम कही भी न थे। कवि प्रमोद दुबे

जिंदगी में मेरी तुम कही भी न थे मौत के पार लेकिन तुम्ही दिखते। कर गया पार में उस जहां को भी अब जिस जहां में मुझे तुम नही …

उस दिन मेने सोच लिया था। कवि प्रमोद दुबे

उस दिन मेने सोच लिया था छोड़ के उसको मैं जाऊंगा। चाहे रोए चाहे तड़पे लोट के लेकिन न आऊंगा। लिकिन जाने क्या हो जाता नयन झील में देख …

तुझको पाने की कोशिश विफल हो रही। कवि प्रमोद दुबे

तुझको पाने की कोशिश विफल हो रही, अच्छा होगा की तुझको भरम मान ले। देख अपनों ने धोका हमे दे दिया, वक़्त है अब दुनिया को तू जान ले। …

कोई हमसे मोहबत इस तरह कर गया। कवि प्रमोद दुबे

कोई हमसे मोहबत इस तरह कर गया, जिस्म को रूह से यु ज़ुदा कर गया। चाह कर भी मैं उसको भुला न सका, मुझको मेरी ही सांसो से दूर …