Author: पंकज

हम तो करेंगे

हम तो करेंगे गुनह करेंगे पुनह करेंगे। वजह नहीं बेवजह करेंगे। कल से ही लो कलह करेंगे। जज़्बातों को जिबह करेंगे निर्लज्जों से निबह करेंगे सुलगाने को सुलह करेंगे। …

कामना

सुदूर कामना सारी ऊर्जाएं सारी क्षमताएं खोने पर, यानि कि बहुत बहुत बहुत बूढ़ा होने पर, एक दिन चाहूंगा कि तू मर जाए। (इसलिए नहीं बताया कि तू डर …

आलपिन कांड

आलपिन कांड   बंधुओ, उस बढ़ई ने चक्कू तो ख़ैर नहीं लगाया पर, आलपिनें लगाने से बाज़ नहीं आया। ऊपर चिकनी-चिकनी रेक्सीन, अन्दर ढ़ेर सारे आलपीन। तैयार कुर्सी नेताजी …

अशोक चक्रधर के चुटपुटकुले

चुटपुटकुले ये चुटपुटकुले हैं, हंसी के बुलबुले हैं। जीवन के सब रहस्य इनसे ही तो खुले हैं, बड़े चुलबुले हैं, ये चुटपुटकुले हैं।   माना कि कम उम्र होते …

तुम दीवाली बनकर

तुम दीवाली बनकर जग का तम दूर करो, मैं होली बनकर बिछड़े हृदय मिलाऊँगा! सूनी है मांग निशा की चंदा उगा नहीं हर द्वार पड़ा खामोश सवेरा रूठ गया, …

इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में

इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में तुमको लग जाएंगी सदियां इसे भुलाने में न तो पीने का सलीका, न पिलाने का शऊर अब तो ऐसे लोग चले …

झूठी देखी प्रीत

जगत में झूठी देखी प्रीत। अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥ मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत। अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज …

रूप रंग से न्यारा

दादू देखा मैं प्यारा, अगम जो पंथ निहारा। अष्ट कँवल दल सुरत सबद में, रूप रंग से न्यारा। पिण्ड ब्रह्माण्ड और वेद कितेवे, पाँच तत्त के पारा। सत्त लोक …

पूजे पाहन पानी

दादू दुनिया दीवानी, पूजे पाहन पानी। गढ़ मूरत मंदिर में थापी, निव निव करत सलामी। चन्दन फूल अछत सिव ऊपर बकरा भेट भवानी। छप्पन भोग लगे ठाकुर को पावत …

इनसान को इनसान बनाया जाए

अब तो मजहब कोई, ऐसा भी चलाया जाए जिसमें इनसान को, इनसान बनाया जाए आग बहती है यहाँ, गंगा में, झेलम में भी कोई बतलाए, कहाँ जाकर नहाया जाए …

मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ।

मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ। मोसौं कहत मोल कौ लीन्हौ, तू जसुमति कब जायौ? कहा करौं इहि के मारें खेलन हौं नहि जात। पुनि-पुनि कहत कौन है माता, को …

मैया! मैं नहिं माखन खायो।

मैया! मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो॥ देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं …

निज भाषा उन्नति अहै

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। अँग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन। पै निज भाषा-ज्ञान बिन, …