Author: Padma Mishra

पिता – के नाम एक कविता

पिता – के नाम एक कविता यह तुम्हारा स्नेह ही तो था, जो संघर्षों के जंगल में, किसी बासंती बयार की तरह, सहलाता रहा मेरे शूल चुभे पांवों को. …

मेरे नव गीत –पद्मा मिश्रा

मेरे नव गीत –पद्मा मिश्रा  सिंक रही हैं भावनाएं रोटियों सी, गोल घिरते जिन्दगी के व्यूह इतने, हर मोड़ पर ज्यों घूमती है गोल रोटी फिर भी कोई आस …

क्या संदेशा लाये बादल

क्या सन्देशा लाये बादल, विकसित सुमन हृदय आंगन में नव हरीतिमा मन प्रांगण में, स्मृतियों की बूंदें बरसीं , मधुरिम गीत सुनाये पायल क्या संदेशा लाये बादल ! विरहाकुल …