Author: नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष"

गीत : मिटटी वाले दीप

मिट्टी वाले दीये जलाना जो  चाहो  दीवाली  हो उजला-उजला पर्व मने कही  रात  न काली हो मिटटी वाले…………….. जब से चला चायना वाला, कुछ की किस्मत फूट गयी विपदा …

असमंजस : उत्कर्ष

【व्यथित मन से उत्पन्न एक दर्द भरा नगमा】 मेरी जिंदगी मझदार में है, अब कैसे पार उतारू…. सोचता पल पल यही में, कैसे खुद को निकालूँ…. वक़्त भी कम …

आराधना : उत्कर्ष

?? आराधना ?? दोहा• प्रातः उठ वंदन करूँ,चरण नवाऊँ शीश । यशोगान तेरा करूँ, इतना दो आशीष ।। सुन लो मेरी अरज भवानी । तेरी महिमा जग ने जानी …

शिकायत ः उत्कर्ष

मोहब्बत क्या होती है,ये तुमने बता दिया । कभी हँसाया हमे,कभी हमको रुला दिया ।। किया था काम वो,कि जीउ सदा फक्र से, तूने कफ़न उठा के,क्यों मुझको सुला …

मेरे दोहे : उत्कर्ष

पालीथिन से मर रही,गायें रोज़ हज़ार । बन्द करो उपयोग अब,नही जीव को मार ।। वर्षो तक गलता नही,नही नष्ट जो होय । दूषित पर्यावरण करे,नाम पॉलिथिन सोय ।। …

दोहा इक्कीसी : उत्कर्ष

कविता लेखन सब करो,साध शिल्प अरु छंद । कविता खुद से बोलती, उपजे बहु आनंद ।। कविता लिखना सीखते,बड़े जतन के साथ । मुख को जोड़ा पैर से,धड़ से …

लघु कथा : सच्चा प्रेम “उत्कर्ष”

“लघु कथा : सच्चा प्रेम” “मेरा तीसरा प्रयास,सादर समीक्षार्थ प्रेषित” ____________________________ पिता की डाँट फटकार को सबहि उनकी नाराजगी समझते है,उनका गुस्सा समझते है,पर एक पिता का हृदय समझ …

गजल ( मेरी ख्वाहिश ) : “उत्कर्ष”

??गजल : मेरी ख्वाहिश?? ★ ★ ★ ★ ★ देश की शान मैं यूं बढाता रहूँ । शीश झुकने न दूं मैं कटाता रहूँ । काट दूँ हाथ वो,जो …

दोहे ः उत्कर्ष

प्रीत करी पुरजोर से,गए द्वेष सब भूल । हुआ अचंभा देख कर,शूल बने जब फूल ।। ==================≠======== चार दिना की जिंदगी,कर हरि का गुणगान । अंत समय पछतायगा,निकलेगे जब …

हिंदी और मेरे विचार ः उत्कर्ष

विषय : हिंदी साहित्य का उत्थान हिंदी और मेरे विचार हिंदी भाषा यह वो भाषा है जो हिन्दुओ के द्वारा बोलचाल और विचारों के आदान प्रदान के लिए सहज …

मरुभूमि और महाराणा(दोहे) ः उत्कर्ष

★★मरुभूमि और महाराणा★★ पंद्रह सौ चालीसवाँ,कुम्भल राजस्थान । जन्म हुआ परताप का,जो माटी की शान ।। माता जीवत कँवर औ,तात उदय था नाम । पाकर ऐसे वीर को,धन्य हुआ …

मुक्तक ः उत्कर्ष

पास तुम्हारे मोहन बैठा, नजरें कहाँ निहार रही ? कहाँ तुम्हारा चित है डोला, क्या तुम सोच-विचार रही ? सुन राधे मैं हूँ बस तेरा इसी बात का ध्यान …

मुक्तक ः उत्कर्ष

हम आज़ादी के दीवाने है, ……. इंकलाब ही नारा है…. उतनी नही हमे जां प्यारी, …….जितना देश प्यारा है… बुरी निगाहे डालो ना तुम, ……..भारत की प्राचीरों पे.. खौला …