Author: nitesh banafer

अगर कभी मेरी याद आए…….

अगर कभी मेरी याद आए तो खिड़की से पर्दा हटाकर उस अधूरे चाँद को देख लेना, वो सिसकता हुआ तुम्हारे कदमो में उतरेगा, फिर मैं मिलूँगा तुम्हे उस चाँद …

मजदूरों ने बनाया था …..

जब कभी खून की दरकार हो तो अस्पतालों में भटकने से अच्छा घर की दीवारों को कुरेद कर देख लेना , वो तुम्हे वहां मिल जाएंगे,इन्हें कुछ मजदूरों ने …

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया…

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया, घर आँगन सुना कर उड़ चली वो गुड़िया। मौसम सी कली मन था केसरिया, खुशबुओं में रंग तलाशती हर वो दूसरी गलियां। सपनो के …

शायद लौट आये वापस वो पन्नों में…..

ना जाने उस कविता का रंग क्या था, ना जाने उसका वो उमंग क्या था, दिल ढूंढ रहा है आज उसे पुराने पन्नो में, कहीं वो शब्द मेरे रूठे …