Author: Neha Limbodiya

मैं नदिया हूं,

मैं नदिया हूं, चुलबुली आज़ाद, निराली हूं. ज़मीन पर रहकर, आसमान को समाती हूं. मन आए तो, सबको सताती हूं. मुझसे खुशियां, मुझसे ही दुख. लहराती हूं फिर भी, …