Author: mukta

चित्तचोर

सूर्य दिन, रात्रि चंद्र संग उन्माद मिलन का करे हिलोर ।। नियम यही अविरल क्रम से, निरंतर चले है चहुँ ओर ।। सागर गगन छूने को आतुर, लाए अम्बर …

धर्म

धर्म —————————–‘ जिस पल पसीजे, तेरा दिल जिस पल पसीजे, तेरा ज़मीर जिस पल पसीजे, तेरी आत्मा उस पल-उस पल- उस पल को ऐ! इंसा ,थाम ले-पकड़ ले मत …

निर्लिप्त जड़ चेतन

निर्लिप्त जड़-चेतन —————————- एक कोना मेरा अपना जंगल के कोलाहल में दिल की गहराइयों से शांत भूख अनगिनत रूपों में अभी भी बन कर हवा मंडरा रही चहूँ ओर …

प्रयत्न

मुश्किलों के चक्रवात जब अपना जोर दिखाते हैं । मेरे अस्तित्व के घरोंदे को जड़ से उखाड़ जाते हैं । जुगनु सी हिम्मत चमकती है, जब कुछ पलों के …

मेरी हिन्दी प्यारी

मेरी हिंदी प्यारी ——————– माँ ने सिखाई अध्यापकों ने सुधारी मन की बात कहने में समर्थ मेरी दादी की प्यारी । खुशबूदार फूलों की क्यारी ।। ऐसी है मेरी …

कविता क्या है ? (मुक्ता शर्मा)

कविता क्या है? विचारों की रेल भावनाओं के डिब्बे और शब्दों का सार्थक खेल लौकिक से आलौकिक तक सच्चाई की जमीन  हो तो क्या कमाल है कविता इस अनुसंधान …

कौआ और गिद्ध (मुक्ता शर्मा)

                कौआ और गिद्ध निर्जीव का माँस नोचने वाले दुर्गंध में जीने वाले                                  एक जैसे,पर दिखने में अलग.                     देखो गिद्ध और कौआ …