Author: Mahendra singh Kiroula

बिटिया : मेरी संजीवनी

मैं सात समुन्दर पार हु रहता हर पल जल थल छू के कहता नेत्र बांध करुणा के बल से क्षतिग्रस्त हु उस धरातल पे झरोखे मैं आकर बिटिया पुकारे …

प्रेम शांति और सामंजस्य

प्रेम शांति और सामंजस्य अपना लो फिर अमन का चिराग जलालो जो बीज नफरतो के बो गए वो अब सास्वत ही सो गए बृक्ष काँटों के हटा कर एक फूलो …

मन्नू : षष्टम अंक

ठंडा पानी भरने जाते एक एक लेकर ड्राम धनिया लहसुन मे नमक पीसकर उसमे खाते कच्चे आम ज्येठ के मास मे अक्सर फल पका करते थे अन्न का सारा …

मन्नू : चतुर्थ अंक

गुरुजी ने प्रश्न दिए एक दिवा मासिक परीक्षा ये थी प्रश्न गणित के १० थे उसमे कठिन समीक्षा ये थी सारे उत्तर गलत हुए और ०/१० आये नंबर इतना …

मन्नू : चतुर्दश अंक

मैंने उनसे प्रेम किया था ह्रदय मे शास्वत स्थान दिया था अक्सर उनको स्मरण करता था कृष्णा के रोज चरण पड़ता था जब भी अपना मेल हुआ था अमृत …

मन्नू : तृतीय अंक

लकड़ी की तख्ती, लकड़ी की कलम और मिटटी से भरी दवात पानी भरता था इसमें प्रतिदिन मस्सी भरने के शीध्र पश्चात ऐसे अक्षर पहचाने थे प्राथमिक पाठशाला गुमटी मे …

मन्नू: द्वितीय अंक

दादा दादी के पास था रहता कहानी सुनIदो उनको कहता नटखट उसके कृत्य निराले पर थोड़ा उसका नाक था बहता सन्त्रास पहनकर प्रतिदिन एक बड़ा कटोरा थाम चाय दे …

श्रावण संध्या

रिमझिम झिम बूंदे बारिश की शुन्य से चन्द्र की प्रतिमा खिसकी नभ पर कृष्ण बादल है छाया तारामंडल के ऊपर आया डरता नहीं डराता सबको मेरे संग घबराता उनको …

निकम्मे बच्चे

माँ अपने हाथो से खिला दे स्नेह से थोड़ा जल भी पिला दे ताकि बुद्धि मेरी बढ़ेगी बिद्या मेरे मस्तिस्क चढ़ेगी माँ ऐसा कर देती है ममता का जल …

मन्नू : प्रथम अंक

पिताजी कार्यरत वायुसेना में परिवार दिल्ली मे रहता था जन्म लिया था पालम मे हरकोई, मन्नू मन्नू कहता था कोई घुमाता साईकिल पर तो कोई खूब खिलाता था उनसे …

एक झलक

माथे पर स्वाभिमान का दर्पण चाल मे शोभा, शब्दों मे संगीत स्वर्ग लोक की अनुभूति होगी जिसके हो तुम मीत शारीरिक हाव – भाव है रहस्य भरे दृटि मे …

बेरोजगारी

बेरोजगारी है बेकारी जिससे मेरी माता हारी बेरोजगारी छाई है समाज के हर छोर जिससे मानव गिरता है नैतिक पतन की ओर मेरे देश को ग्रस्त कर गयी ये …

महेन की बुझती ज्योति

आज दुल्हन के लाल जोड़े मे, उसे सखियों ने सजाया होगा मेरी जान के गोरे हाथो को मेहँदी से रचाया होगा गहरा होगा मेहँदी का रंग उसमे नाम छुपाया …

एक फरेब : तेरी मोहब्बत

जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत क्यों दिखाई छाव मुझको जब था मै जीवन पथिक …

स्वप्न : साहित्य प्रेम का बीज

कल रात, हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञानं मे डिक्टेशन थी आयी जिला अल्मोड़ा मे मैंने प्रथम श्रेणी थी पायी जगह जगह से लोग आये थे देने मुझे बधाई प्रफुल्लित था, गौरवान्वित …

अतीत की झंकार

अतीत की झंकार से न डर ये तेरा भविष्य नहीं इससे जुड़ा है ये मगर कोई प्रलाप-विलाप न कर महत्वकांशा, याद रख लक्ष्य कठिन परिश्रम की बागडोर थाम पग …

इंदु अपरिचित

इंदु मिलन की सीर बस एक विरह के पाहन अनगिनत वहाँ संकरे मार्ग, अनभिज्ञ दिशा अनुभूति हुयी थी स्वर्ग की जहाँ दोष एक मात्र बलिदान और प्रेम अक्सर ये …