Author: mithilesh2020

पुरुषार्थ उद्यम के सहारे ‘यज्ञ’ कर

चादर तान कर किसको सोना अच्छा नहीं लगता अधखुली आँख से तब और सपने बेहतर से दिखते हैं कुछ-कुछ ‘दिवा-स्वप्न’ से आह! मगर ज़िन्दगी के थपेड़े जगाते हैं, झिंझोड़कर …

मनुष्य हूँ…

क्षुद्र हूँ ब्राह्मण, क्षत्रिय वाला नहीं व्यवहार में उग्र हूँ मुर्ख हूँ ज्ञान, विज्ञान वाला नहीं अहम् कूप का मण्डूक हूँ अयोग्य हूँ धन, क्षमता वाला नहीं स्वार्थ प्रेरणा …

यहीं सामर्थ्य पैदा करो…

गणवेश वाले का निवेश- निवेश चिल्लाना अब देश को ‘अख़र’ रहा है। हमारे परिवेश पर फिरंगी का हंसना बिहसना सदियों से हर ‘पहर’ रहा है। व्यवसाय के रास्ते आना …

साथ साथ हमें चलना होगा

चलना होगा, साथ साथ हमें चलना होगा स्व-अहम को छलना होगा रूठों के पाँव में पड़ना होगा ऊँच-नीच, भेद-भाव, जात-पात को तजना होगा जगना होगा सुबह सुबह हमें जगना …

ले पुनर्जन्म आओ पुण्यात्मा

बातें करते हैं लोग यहाँ जीते-मरते रहे लोग यहाँ निज प्राण दिया परमारथ में है धर्मवीर कोई और कहाँ   गुरुओं का मान रखा जिसने इस हिन्द की शान …

उन्हें बारम्बार प्रणाम…

पत्नी, प्रिये, अर्धांगिनी और धर्मपत्नी सदृश अगणित नाम जीवन संतुलन, उत्थान और सृष्टि की कथा रचना उनका काम सुख दुःख, संयोग वियोग और रुचि अरूचि में चलती हैं अविराम …

मानवता की मिसाल है मेट्रो …

बैठ गया ब्लू लाइन मेट्रो पर सुबह-सुबह जाना था आगे पहुंचे स्टेशन पर भागे-भागे लम्बी लाइन लगी थी सबको ही जल्दी थी टोकन के लिए आगे खिसके लाइन में …

मच्छरों से ‘सहानुभूति’

डर लगता है मुझे ही नहीं सबको क्योंकि, ऐसा कोई बचा नहीं ‘मच्छर’ ने जिसको डंसा नहीं जी हाँ! एक ऐसा प्राणी जो कभी भेदभाव नहीं करता अमीर-गरीब, युवा-बुजुर्ग, …

जातिवाद ही खतरा है…

न भ्रष्टाचार खतरा है न अत्याचार खतरा है ऊंच- नीच, भेदभाव ने भारत का ‘पर’ कतरा है  ——————— न कोई हिन्दू खतरा है न मुसलमान खतरा है हज़ारों साल …