Author: Garima Mishra

मेरे गाँव की सड़क

कहीं टूटती सी, कहीं फूटती सी, मेरे गाँव के बीच से गुज़रती ये टूटी-फूटी सड़क.. जानती है दास्ताँ, हर कच्चे-अधपक्के मकान की, हर खेत,हर खलिहान की… ये सड़क जानती …

चेहरा कोयले का…

कौशाम्बी की कपकपाती ठंडी में, कौड़ा तापते-तापते, एक ख्याल मन की गली से गुज़रा.. क्या ये लाल-लाल कोयले के टुकड़े,  आपस में बातें करते होंगे?  जलते-जलते अपने आखरी दम …