Author: Meena Bhardwaj

“सावन” (हाइकु)

कारे बदरा रिमझिम बरसै मन हरषै नाचे मयूर कोयल की कुहूक मनभावन‎ मुदित जीया हरी-भरी धरा अम्बर खिला धानी चूनर लहर लहराए गौरी मुस्काए श्रावणी तीज शिव-गौरी पूजन भक्ति …

“अष्ट प्रहर” (हाइकु)

उजली भोर खगों का कलरव उनींदी आँखें‎ ग्रीष्म महिना तपती दोपहरी सूनी गलियाँ गोधूलि वेला ताँबे सा दिनकर दृष्टि ओझल सघन कुँज जुगनू की चमक मृदु बयार मुदित हास …

“हे कृष्णा!”

मैं तेरी जोगन सुन बनवारी मन मन्दिर में आन विराजो रास रचैया , गोवर्धन धारी डगर-डगर ढूँढू तोहे सांवरे राह निरख नैना भए बावरे हे गोपेश्वर , पीताम्बरधारी दधि …

“वर्ण पिरामिड”

(1) हे ! कान्हा ब्रज के प्राणाधार नन्द यशोदा राह निहारत सूना यमुना तट व्यथित राधिका रानी कब आओगे गिरधारी सुनियो अर्ज बांके बिहारी! (2) मैं और सवेरा सुनहली …

“कहानी” (हाइकु)

एक कहानी सुनहली धूप सी मुट्ठी में बन्द माँ का दुलार रुहानी अहसास कल की बात स्कूल की राह सखियों की टोलियाँ मीठी बोलियां भाई-बहन छोटी-छोटी खुशियाँ किस्सेगोइयां कच्चा …

“परवाह”

तुम्हारी छोटी-छोटी बातें मुझे अहसास करा देती हैं कि तुम्हें मेरी परवाह है मेरी बातों की शुरुआत से पहले ‘एक बात कहूँ’ की मेरी आदत स्मित सी मुस्कान तुम्हारे …

“यूं ही”

बिना बताए,चुपचाप चले आना । दबे पाँवों आके,यूं ही चौंकाना ।। नासमझी सी बातें,इशारों में समझाना । किताबों में बेतरतीब से,ख़तों को छुपाना ।। उजली चाँदनी रातें,तारों संग बिताना। …

“सिया के राम” (हाइकु)

प्रिय लखन फरकै वाम अंग जी में संशय । हे ! मृग छौने मेरी मृगनैयनी थी यहीं-कहीं । भ्रमर पुंज लता-प्रसून कुंज देखी वैदेही ? रघु नन्दन नील नैन …

“राधा-कृष्ण”(हाइकु)

राधिका संग झूठी रार मचाई कृष्ण कन्हाई। नील गगन तारों की छाँह तले नैना भटके। चाँदनी रात शबनमी बयार मौन खटके। कुछ बोलो ना अपनेपन संग मन की बातें। …