Author: मनुराज वार्ष्णेय

चलो प्यार करें

तुमसे  चेहरे  का आईना लिये उल्फत  अपनी  गुलजार  करें इक  दूजे   से  खुल  जायें  तो दिल  बातों  का   बाजार  करें जो  दबी  हुई  दिल  के भीतर होठों  से   अब  …

बसन्त पञ्चमी

माँ तेरी वीणा के स्वर से जीवन का संगीत मिला माँ  तेरे  शब्दों के बल से मुझको मेरा गीत मिला तुलसी  मीरा  सूर  कबीरा  तुझसे ही जाने जाते माँ …

दिल की बात

(1) वो  जो  ख्वाब मिला, आंखों को  मेरी, अब  नही मरता कभी जो दिल को थी,उससे शिकायत,अब नहीं करता कहो  जाकर  उसे, जो  छोड़  कर, मुझको  चला  गया बसी  …

हो दिल की दुआओं में

कभी आँखों के खालीपन, कभी दिल की दुआओं में यकीनन  दूर  हो  मुझसे, या हो  दिल  की  पनाहों में भले  रूठे  हो  तुम  हमसे, मगर  ऐहसास  बाकी   है इन्ही  …

मुझको दिखा ओ रहगुजर, तेरे अन्दर हरा क्या है

मुझको दिखा ओ रहगुजर, तेरे अन्दर हरा क्या है तू  मुश्किलों में  भी खड़ा, तेरे अन्दर  भरा क्या है तुमसे बिछड़ के भी अभी तक, जो हम प्यार करते …

बच्चों का हक (CHILD’s RIGHTS)

दुनिया की सच्चाई समेट, कैसी बातें ये हम लिखते खुशी मिले जिनके हिस्से, उनके हिस्से में गम दिखते जब घर के अंधियारों तले, वे उजियारे से बेखबर मिली छोटी …

लब्जों को थोड़ा दबा कर रखना

अपने दिल मे किसी नये को बता कर रखना अपने लब्जों को भी थोड़ा दबा कर रखना भले जुल्फों के नीचे किसी और को बिठा लो मगर उनसे हमारी …

पाने से प्यार नही मिलता

खिलते है फूल जवानी में जब प्यार होता नादानी में ….. प्यार का रंग चढ़ता जाता प्यारों की आनाकानी में ….. सीधा मार्ग में प्यार मिले है नही मोड़ …

आंखें नम नही करता

क्या करूँ  दिनभर, मन  नही  लगता वो  तुम्हारा  फोन,  अब  नही  लगता ….. ख्वाब अब  तो सारे, मर  से गये  है दिल  अपनी बात, अब नही  करता ….. मंदिर …

फिर से इक दीप जले दिल में

जो   बसा   अंधेरा   मन   में  है पतझड़  सा  तन  सावन  में  है दिल   में   भरे   ऐहसास   नही वाणी   में   भी    उल्लास   नही बेचैन  रहो  जो  तुम  दिन   भर …

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में

दिखाने को सबको पकड़ खड़े अजगर , इसको छोड़ो तो अमृत मिल जायेगा दूसरों की देखा देखी फाड़ जो चरित्र लिया , भूला लौट आये तो चरित्र सिल जायेगा …

हे विघ्नहरण गौरीलाल

हे विघ्नहरण गौरीलाल, जनक जिनके है महाकाल रूखे जिनके बिन सुर व ताल, दूर करते है जो अकाल हो रिद्धि-सिद्धि के तुम स्वामी, हो सकल जग में सबसे ज्ञानी …

सारे वादे जो तोड़ गये – मनुराज वार्ष्णेय

मोहब्बत के इस बंधन में तुम , तन्हा सूना मुझको कर गये प्यारी रौशन रातों को तुम , अश्कों की धारों से भर गये मुझसे ऐसा क्या पाप हुआ …

बाँसुरी तान फिर छेड़ जाओ

प्रेम ज्ञान दिया स्वामी तुमने , कैसे तुमको न प्यार करे तुम जीवन पथ प्रदर्शक का , हम मिलजुल कर त्यौहार करें हे प्रभु ज्ञान पर चढ़ते तम पर …