Author: मनुराज वार्ष्णेय

उदासी से भरा ये दिल हमारा देखिए

या तो समंदर में , वबंडर का नजारा देखिए या उदासी से भरा , ये दिल हमारा देखिए गर जिंदगी है खुशनुमा , तो कुछ ऐसा करके देखिए दिल …

फिर नया गांधी लाओ

देश मे एक आंधी लाओ , फिर नया गांधी लाओ गूंजेगा बस एक ही नारा , जय जय हिंदुस्तान हमारा बहुत हुआ ये भ्रष्टाचार , लौटाओ फिर शिष्टाचार नहीं …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

हमें अंग्रेजी नहीं आती

जुबां पर क्यों तुम्हारे अब , मेरी कोई बात नही आती मगर तुम्हारी याद के बिन , हमारी कोई रात नहीं आती अंग्रेजी में कभी जो तुम , दिखाती …

नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन

ऐ मेरे ! तू प्यार सुन , तू प्यार से मेरी धुन नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन सुबह को उठता है एक माली , सुबह होती …

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए नैनों में जो राज अब तक छुपे थे देकर मोहब्बत वो इनको पार कर …

कड़वाहट जब छनके आयी है – मनुराज वार्ष्णेय

दिल की कोई आवाज कलम से आज तनके आयी है पुरानी यादों से फिर से कोई तस्वीर बनके आयी है बेचैनी जो हुई दिल मे कहीं तो हरकत हुई …

मैंने जाकर पूछा पंडित से

मैंने जाकर पूछा पंडित से दुःख दर्द कितने शेष रह जायेंगे एक भी गृह शेष बचेगा या सब मुझसे टकराएंगे कोई सरल सा उपाय बताकर मेरे दुःख दर्दों को …

आसमान को जमीं पर चलते देखा है

मैंने आसमान को जमीन पर चलते देखा है अमीरों के माँ बाप को आश्रम में पलते देखा है कौन कहता है कि सच की हमेशा जीत होती है एक …

मैं प्यार नही कर सकता

समझ गया मैं भली भांति दुनिया के तौर तरीकों को चोरो का पलड़ा भारी है मिलती राहत न सरीफों को क्यों दिल लगाने से अक्सर दिल चूर चूर हो …

क्यों बदली बदली ये नजरें

    क्यों बदली बदली ये नजरें , क्या दिल मे छुपाये बैठी हो गर प्यार मेरा तुम चाहती हो , क्यों पलकें झुकाये बैठी हो इक बार करो …

हर कोई शायर हो गया

चमत्कार दिखाया तो नमस्कार हो गया अमावस की रात को चाँद भी गायब हो गया दर्द-ए-दिल पनपने लगा तो ये करिश्मा देखने को मिला लिखने लगे सब अपनी दास्ताँ …

इतनी जल्दी क्यों तन्हाइयों में हम रह गए

प्यार के जाल में फँसकर हम रह गए जो सुनते न सुनाते वो बात कह गए हम तो संभले थे एक लंबे अरसे के बाद पर तेरी हवाओं में …