Author: मनुराज वार्ष्णेय

मैंने जाकर पूछा पंडित से

मैंने जाकर पूछा पंडित से दुःख दर्द कितने शेष रह जायेंगे एक भी गृह शेष बचेगा या सब मुझसे टकराएंगे कोई सरल सा उपाय बताकर मेरे दुःख दर्दों को …

आसमान को जमीं पर चलते देखा है

मैंने आसमान को जमीन पर चलते देखा है अमीरों के माँ बाप को आश्रम में पलते देखा है कौन कहता है कि सच की हमेशा जीत होती है एक …

मैं प्यार नही कर सकता

समझ गया मैं भली भांति दुनिया के तौर तरीकों को चोरो का पलड़ा भारी है मिलती राहत न सरीफों को क्यों दिल लगाने से अक्सर दिल चूर चूर हो …

क्यों बदली बदली ये नजरें

    क्यों बदली बदली ये नजरें , क्या दिल मे छुपाये बैठी हो गर प्यार मेरा तुम चाहती हो , क्यों पलकें झुकाये बैठी हो इक बार करो …

हर कोई शायर हो गया

चमत्कार दिखाया तो नमस्कार हो गया अमावस की रात को चाँद भी गायब हो गया दर्द-ए-दिल पनपने लगा तो ये करिश्मा देखने को मिला लिखने लगे सब अपनी दास्ताँ …

इतनी जल्दी क्यों तन्हाइयों में हम रह गए

प्यार के जाल में फँसकर हम रह गए जो सुनते न सुनाते वो बात कह गए हम तो संभले थे एक लंबे अरसे के बाद पर तेरी हवाओं में …

आराम चाहिए – मनुराज वार्ष्णेय

नबाबों का साथ , लोगों का सलाम चाहिए चैन की नींद , दिन भर का आराम चाहिए थक गया हूँ दुनिया की भागदौड़ से मुफ्त में मिले ऐसा कोई …

ब्रज की होली कान्हा संग हो ली – मनुराज वार्ष्णेय

ब्रज की गलियों का देखो ये नजारा रंग लगाने राधा को आया कृष्ण प्यारा देखो राधा को सखियों संग खड़ी है रंग लगाने की मस्ती इसको चढ़ी है देख …

खुशी ढूढने निकला हूँ – मनुराज वार्ष्णेय

खुशी ढूढने निकला हूँ पर मन मेरा क्यों उदास है चैन नही मिलता क्यों मुझको बस बेचैनी ही पास है क्यों दुखी आज मैं हूँ इतना क्यों मन मे …

तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा – मनुराज वार्ष्णेय

जिसको मैंने सोचा कभी न , काम वो भी मैं करने लगा तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा जब से तू आयी है …

गुरु वन्दना – मनुराज वार्ष्णेय

नमामि गुरुदेव तुमको समर्पण मेरा जो जीवन है तुमको ही अर्पण तुमने जीवन का पाठ पढ़ाया तुम्ही ने बुलंदी पे चढ़ना सिखाया तुमसे ही जीवन का चिराग जला है …

तिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगा – मनुराज वार्ष्णेय

  एक छोटा मुन्ना पापा से अपने जिद करता है हर बार बॉर्डर पर जाने के लिए पापा मैं भी हूँ अब तैयार दुनिया के खेल तमाशे झूठे बस …

मैं आज बहुत डर रहा हूँ – मनुराज वार्ष्णेय

मैं आज बहुत डर रहा हूँ यादों को दोहरा रहा हूँ दिल को समझा रहा हूँ क्या है मेरे डर का राज ये आपको बता रहा हूँ मैं आज …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे – मनुराज वार्ष्णेय

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

ऐ मेरे प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी जान-ए-तमन्ना तुमको कैसे दूर हम कर दे सजाये दिल ने जो सपने तो कैसे चूर हम कर दे कई शब के अंधेरों में तुम्ही ने दिल को समझाया …

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

????????????    गजल    ???????????? मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए नैनों में जो राज अब तक छुपे थे देकर …