Author: मनुराज वार्ष्णेय

आराम चाहिए – मनुराज वार्ष्णेय

नबाबों का साथ , लोगों का सलाम चाहिए चैन की नींद , दिन भर का आराम चाहिए थक गया हूँ दुनिया की भागदौड़ से मुफ्त में मिले ऐसा कोई …

ब्रज की होली कान्हा संग हो ली – मनुराज वार्ष्णेय

ब्रज की गलियों का देखो ये नजारा रंग लगाने राधा को आया कृष्ण प्यारा देखो राधा को सखियों संग खड़ी है रंग लगाने की मस्ती इसको चढ़ी है देख …

खुशी ढूढने निकला हूँ – मनुराज वार्ष्णेय

खुशी ढूढने निकला हूँ पर मन मेरा क्यों उदास है चैन नही मिलता क्यों मुझको बस बेचैनी ही पास है क्यों दुखी आज मैं हूँ इतना क्यों मन मे …

तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा – मनुराज वार्ष्णेय

जिसको मैंने सोचा कभी न , काम वो भी मैं करने लगा तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा जब से तू आयी है …

गुरु वन्दना – मनुराज वार्ष्णेय

नमामि गुरुदेव तुमको समर्पण मेरा जो जीवन है तुमको ही अर्पण तुमने जीवन का पाठ पढ़ाया तुम्ही ने बुलंदी पे चढ़ना सिखाया तुमसे ही जीवन का चिराग जला है …

तिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगा – मनुराज वार्ष्णेय

  एक छोटा मुन्ना पापा से अपने जिद करता है हर बार बॉर्डर पर जाने के लिए पापा मैं भी हूँ अब तैयार दुनिया के खेल तमाशे झूठे बस …

मैं आज बहुत डर रहा हूँ – मनुराज वार्ष्णेय

मैं आज बहुत डर रहा हूँ यादों को दोहरा रहा हूँ दिल को समझा रहा हूँ क्या है मेरे डर का राज ये आपको बता रहा हूँ मैं आज …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे – मनुराज वार्ष्णेय

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

ऐ मेरे प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी जान-ए-तमन्ना तुमको कैसे दूर हम कर दे सजाये दिल ने जो सपने तो कैसे चूर हम कर दे कई शब के अंधेरों में तुम्ही ने दिल को समझाया …

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

????????????    गजल    ???????????? मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए नैनों में जो राज अब तक छुपे थे देकर …

प्रेम मंदिर – मनुराज वार्ष्णेय

???????? ???????? प्रेम मंदिर ???????? ???????? मैं प्रेम पुजारी दिल के मंदिर का सिर्फ तेरे ही गुनगान मैं गाऊँ पत्थर की मूरत, मूरत में सूरत, सूरत पे तेरी मर …

मृदु चुम्बन – मनुराज वार्ष्णेय

मंजर कैसा था वो मेरा जिससे जीवन पावन हो गया उसकी आँखों में आँखें डाल मैं मुर्ख सा बन खो गया प्यासे थे जो होठ मेरे फिर उनकी सारी …

प्यार की पुकार

तुम डाले डोरा दिल पर कब्ज़ा किये बैठी हो रातों दिनों न कुछ भिन्न नींदें उड़ाये बैठी हो हम जान है तुम्हारी तुम जान हो हमारी महबूब, जान, प्रिय …

स्वपनादेश – मनुराज वार्ष्णेय

???????????? स्वपनादेश ???????????? एक था वो भी समय जब ऐसा कुछ था हो गया हस्ती मेरी मिट गयी और कल्पना में खो गया स्थिति क्या बन गयी क्या था …

गजल – एक चिड़िया आ गयी है जिंदगी की डाल पर (मनुराज वार्ष्णेय)

एक चिड़िया आ गयी है जिंदगी की डाल पर दिल मेरा भी बैठा है अपने हठ की हड़ताल पर हल किये लाखों मुक़दमे और दुनिया के भरम कैसा प्रश्नचिह्न …

दबा ली वो ख्वाइशें भुला दिया अरमानों को

दबा ली वो ख्वाइशें भुला दिया अरमानों को भायी नही थी जो मेरे अपने ही नादानों को बदल दिए वो मार्ग सारे जो जाते थे सब तुम तक अँधा …

फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में – मनुराज वार्ष्णेय

फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में छोड़ गमो की सड़कों को मैं लेटा आनंद की छाव में बहुत तड़पा हूँ प्यार में पड़कर क्या क्या …

सफलता बड़ी या अपने – मनुराज वार्ष्णेय

सफलता ऐसी हो जिसका दूर दूर तक नूर हो जाये कर्म ऐसे करो जो दूर दूर तक मशहूर हो जाये आगे बढ़ते बढ़ते बस इतनी बात का ध्यान रखना …

एक शाम बेवफाई के नाम- मनुराज वार्ष्णेय

छोड़ कहाँ तुम चले गए हो और कहाँ तक जाओगे उम्मीद रखूँ मैं लौटने की या जीवन भर तड़पाओगे मदिरा बनेगी मेरी साथी दिन रात मैं इसको पीऊंगा रूठ …

बसंत सा प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

आज पूछ रहे है ये लोग कि अब हम शायरियाँ नही लिखते है हर पल खुश रहते है ऐसा क्या हुआ जो अब उदास नही दिखते है उन लोगों …

विरह का साथी – मनुराज वार्ष्णेय

बगीचे मे बैठा था यादों में खोया था तभी एक तितली मेरे पास आकर बैठ गयी शायद कुछ कहना चाहती थी अपना हाल सुनाना चाहती थी पर मैं तो …

लगता है देश में फिर से चुनाव आ गया -मनुराज वार्ष्णेय

गूँज उठी है धरती मेरे प्यारे हिंदुस्तान की निकल पड़ी है रैली राजनीति के शैतान की उठ रहा है अँधा धुआँ चलती सर्द हवाओं से रचा जा रहा नया …

यादों की बारात – मनुराज वार्ष्णेय

सब कुछ होते हुए भी बंदिशों में गुजारा किया करते है रसपान को छोड़ कर जहर का घूँट पिया करते है दिल की बीमारी से जूझ रहे है फिर …