Author: मनुराज वार्ष्णेय

फिर से इक दीप जले दिल में

जो   बसा   अंधेरा   मन   में  है पतझड़  सा  तन  सावन  में  है दिल   में   भरे   ऐहसास   नही वाणी   में   भी    उल्लास   नही बेचैन  रहो  जो  तुम  दिन   भर …

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में

दिखाने को सबको पकड़ खड़े अजगर , इसको छोड़ो तो अमृत मिल जायेगा दूसरों की देखा देखी फाड़ जो चरित्र लिया , भूला लौट आये तो चरित्र सिल जायेगा …

हे विघ्नहरण गौरीलाल

हे विघ्नहरण गौरीलाल, जनक जिनके है महाकाल रूखे जिनके बिन सुर व ताल, दूर करते है जो अकाल हो रिद्धि-सिद्धि के तुम स्वामी, हो सकल जग में सबसे ज्ञानी …

सारे वादे जो तोड़ गये – मनुराज वार्ष्णेय

मोहब्बत के इस बंधन में तुम , तन्हा सूना मुझको कर गये प्यारी रौशन रातों को तुम , अश्कों की धारों से भर गये मुझसे ऐसा क्या पाप हुआ …

बाँसुरी तान फिर छेड़ जाओ

प्रेम ज्ञान दिया स्वामी तुमने , कैसे तुमको न प्यार करे तुम जीवन पथ प्रदर्शक का , हम मिलजुल कर त्यौहार करें हे प्रभु ज्ञान पर चढ़ते तम पर …

जिंदगी संवरने का नाम नहीं लेती

जिंदगी संवरने का नाम नहीं लेती तुम्हे सोचने के सिवाय कोई काम नहीं लेती देता हूँ हर कीमत , तुम्हे भूल जाने की मगर मुँह मांगा भी , ये …

दिल के टुकड़े हजार करते है

जुबाँ कड़वी हो कितनी भी , तुम्ही से प्यार करते है तेरी तस्वीर से भी हम तो , आँखें चार करते है ये परदे में तुम्हारा हुस्न जो , …

उदासी से भरा ये दिल हमारा देखिए

या तो समंदर में , वबंडर का नजारा देखिए या उदासी से भरा , ये दिल हमारा देखिए गर जिंदगी है खुशनुमा , तो कुछ ऐसा करके देखिए दिल …

फिर नया गांधी लाओ

देश मे एक आंधी लाओ , फिर नया गांधी लाओ गूंजेगा बस एक ही नारा , जय जय हिंदुस्तान हमारा बहुत हुआ ये भ्रष्टाचार , लौटाओ फिर शिष्टाचार नहीं …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

हमें अंग्रेजी नहीं आती

जुबां पर क्यों तुम्हारे अब , मेरी कोई बात नही आती मगर तुम्हारी याद के बिन , हमारी कोई रात नहीं आती अंग्रेजी में कभी जो तुम , दिखाती …

नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन

ऐ मेरे ! तू प्यार सुन , तू प्यार से मेरी धुन नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन सुबह को उठता है एक माली , सुबह होती …

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए नैनों में जो राज अब तक छुपे थे देकर मोहब्बत वो इनको पार कर …

कड़वाहट जब छनके आयी है – मनुराज वार्ष्णेय

दिल की कोई आवाज कलम से आज तनके आयी है पुरानी यादों से फिर से कोई तस्वीर बनके आयी है बेचैनी जो हुई दिल मे कहीं तो हरकत हुई …