Author: manoj charan

मैं क्यों लिखूँ

मन तो मेरा भी करता है कविता लिखूँ, चारों दिशाओं पे, मुस्कुराती फिज़ाओं पे, महकती हवाओं पे, झूमती लताओं पे, बल खाती नदियों पे, कलकल बहते झरनों पे, हिमालय …

मैं क्यों लिखूँ

मन तो मेरा भी करता है कविता लिखूँ, चारों दिशाओं पे, मुस्कुराती फिज़ाओं पे, महकती हवाओं पे, झूमती लताओं पे, बल खाती नदियों पे, कलकल बहते झरनों पे, हिमालय …

हालत गंभीर है मेरे देश में

सरेराह नीलाम हो रही आबरू जब देश में, कैसे गाऊँ गीत प्यार के, हालत गंभीर है मेरे देश में। सरे बाजार जब बम फटते हो, दूध पीते बच्चे कटते …

अतीत का अमृत

अतीत के पन्ने पलटता हूँ, तो कुछ ख्वाब, कुछ दर्द, कुछ सपने, कुछ गलतियाँ, अचानक जीवंत हो उठते है। चहकने लगता है, बचपन अचानक अतीत के आँगन में। मामा …

राजस्थान के किसान की दिल्ली मे आत्महत्या

देश का जनाज़ा है ये कैसा है तमाशा जाने, देश का किसान आत्महत्या पे उतारू है। कैसी है समस्या जाने अन्नदाता परेशान, देश की सरकार भी अब हो गई …

चेतक रो कर्ज

हाड़- हाड़ धाड़-धाड़ मची मारवाड़ मैं। जाड़-जाड़ खाड़-खाड़ फाड़-फाड़ माड़ मैं। हिंदवाणी सूरज लगन लाग्यो फिको-फिको। भालो ले’र जाग्यो शेर दडुक्यो मेवाड़ मैं।१। ढूंढाड़ तो जाय बड्यो अकबर री …

म्हारे हीवड़े री कोर

म्हारे हीवड़े री ओ कोर ! गई कठे तू मनै छोड़, रिश्तो हीवड़े स्युं तोड़, जीवड़े नै एकलो छोड़, गयी म्हारै मनड़े न मोहर, म्हारै हीवड़े री कोर। हीवड़ों …

क्या भारत आजाद हुआ है?

फूट रहे हैं बम और गोले, कोई नहीं आबाद यहाँ, कहने को आजाद है भारत, कोई नहीं आजाद यहाँ, बहती गंगा को रोक दिया चंद रूपियों के गलियारों में, …

मैं कविता से आग लगाता हूँ

मैं चारण हूँ चंडी वाला, चलता शोणित धारों पर, मैं झूलता आया बचपन से झूला तलवारों पर, खेला खेल सदा ही मैंने, बरछी तीर कटारों से, झेला है हर …

च्यार दिनां की जिंदगाणी रे

च्यार दिनां की मिली आ जिंदगाणी रे, एक दिन दुनियाँ सूं काया चली जाणी रे, काम करयोडा थारा बणसी निसाणी, झूठ-कपट की सारी झूठी कहाणी रे।१। आम तो तूँ …

मैंगाई री माया

मैंगाई तो बढ़बा लागी, ज्यू दिनूगे की छाया रे। राज बिचारो काईं करैला, आछा दिन आया रे।। आलू टिंडा और टमाटर भोत घणा दिन खाया हा। भिण्डी-तरिया-घिया म्हे तो …

कोशिस करने वालो की हार नहीं होती

कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती, घर से भाग निकले उनकी कोशिस कभी प्यार नहीं होती, करे भले ही शादी, पर शादी वो खुशग्वार नहीं होती, गृहस्थी …

माँ भारती रै भाल री रुखाल कुण करै

माँ भारती रै भाल री रूखाल कुण करै, घर रा ही जद खाडा खोदै बानै कुण भरै। उतराधी दिखणनादी देखो, अगुणी आथूणी मै, लाय लागरी लपटा उठे, देखो च्यारु …