Author: mangala

Oasis !!

रेत का पानी सावन न देखूँ, बारिश बा देखूँ प्यासे नैनों की आस बन जाती हूँ थके क़दमों की मन्जिल समझो रेत का पानी सबसे कहलाती हूँ ! कोई …

कैरी…….खट्टी मीठी बातें !

सारे नन्हे कदम निकले लेकर अपना कलम और किताब भूगोल विज्ञान भाषा सीखा दो दूनी चार और कितने हिसाब ! फिर चली यह किलकारियाँ छुपते छुपाते बंद मुट्ठियों में …

एक Cup Chai ….

खुल गई आँखों कि चादर से गहरे नींदों की सुस्तियाँ । कदमों पे होसला बुनते लिए जातीं हुँ दिन की अँगडाइयाँ ! जिम्मेदारी के सिरहाने है कितनी मन्जिलें हर …