Author: Madhu tiwari

फिर आना कन्हैया — मधु तिवारी

फिर आना कन्हैया गोकुल नगरी फोड़ देना सांवरिया मेरी गगरी जमुना तट जल भरने जाऊँ जाके वहाँ तेरा दर्शन पाऊँ छवि तेरी भर लूं मैं मन गगरी फिर आना …

गौरैया दिवस पर मेरी रचना ” गौरैया रानी ” पढ़कर विलुप्त होती गौरैया को पुनः सहेजने मे साथ दे । आप सभी गुणी जनों से मैं करबद्ध प्रार्थना करती …

यकीन दिलाया करो — मधु तिवारी

तड़प जाता हूं मैं, नजरें न चुराया करो बिखर जाता हूं तुम न सिमट जाया करो देखूं जो महफिल में हंसते बतियाते हुए मर मिटता हूं यूँ न नाज …

नारी शक्ति कहलाई हूं— मधु तिवारी

हे नीली छतरी वाले ! धन्य हो जिसने मुझमें वो बात दी है गुणी जनों मे जगह बनाऊं मुझको ऐसी औकात दी है दुनिया रंग बिरंगी देखूं ऐसे दो …

देखो क्षितिज की ओर— मधु तिवारी

होती है संध्या होता यही भोर यहि है धरा अम्बर का छोर देखो तुम क्षितिज की ओर मिले जहाँ पर भूमि आकाश होता खत्म सविता प्रकाश नहीं आगे इसके …

उठ गया

जाने क्यों कायनात से,भरोसा अपना उठ गया लगता है हमदर्द कोई, हमसे कहीं तो रुठ गया बांधा था बड़ी मुश्किल से नेह डोर को जिनसे पता चला न कौन …

लो! बसंत सुहाना आ गया—मधु तिवारी

लो! बसंत सुहाना आ गया श्याम सलोना मनभावन सा सबके मन को भा गया लो बसंत सुहाना आ गया सुखद पूरवाई बहने लगी है कोयल भी कुहु कुहु कहने …

नया गीत लिखूंगी—मधु तिवारी

नया साल मे नई उमंग,मन मे उठा है नई तरंग इसी खुशी की रीत लिखूंगी आज नया कोई गीत लिखूंगी सागर, झरने ,पेड़ ,पहाड़ चंचल नदिया, शेर दहाड़ प्रेम …

आ गया नया साल—मधु तिवारी

बीत गया पुराना, आ गया नया साल याद करो,बीते बरस मे क्या किया है कमाल कभी किसी गिरते को बचाया, गिरे को उठाया जिसे ठुकराया औरों न,उसको गले लगाया …

उस बेटी की फिर याद आई—मधु तिवारी

उस बेटी की फिर याद आई चारों ओर उदासी छाई वैसे हरदम रहती दिल मे, बरसी मे फिर ली अंगड़ाई चारों ओर अंधेरा था दुर्दिन ने तुझको घेरा था …

शाला जाते देखती हूं—मधु तिवारी

लड़कियों को सायकल से शाला जाते देखती हूं खेतों मे धान की,शाला मे ग्यान की, फसलों को नित मैं, लहलहाते देखती हूं लड़कियां जो गांव से निकल नहीं पाती …