Author: laxman

* नजर*

लग चूकी है बूरी नजर मेरे देश को कोई मेरे देश का बँटवारा ना करदे । बहूत बङा था हिन्दुस्तान हमारा दो शब्द काट कर फिर से कोई पाकिस्तान …

*ठग*

फिर रहाहै मेरे देश मे ठगीया मेरे देश को कोई ठग लेगा । बनां फिरे बहूरूपिया वेशभूषा अपनी बदल लेगा । छल कपट और बेईमानी से विश्वासघात कर लेगा …

बनङो

भारत माता की देख आख्या मे आँसू माँ आज मैं बनङो स्यों बणस्यों । लै हाथों मे तलवार बाध केसरीया साफो जिया लङे दो शेर शेर लङ ज्यों लङ …

अक्षर

मत लिख कवि मूझे कोरे कागज पर कोई कागज गिला कर देगा । हाथ पाँव पोछ कर अपमान मेरा करदे गा॥ अ…….से अमर बन जाऊं । क्ष …….से क्षत्रिय …