Author: लता हाड़ा

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है। एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों, इस दिए में …

इनसे मिलिए

पाँवों से सिर तक जैसे एक जनून, बेतरतीबी से बढ़े हुए नाख़ून कुछ टेढ़े-मेढ़े बैंगे दाग़िल पाँव, जैसे कोई एटम से उजड़ा गाँव टखने ज्यों मिले हुए रक्खे हों …

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अजब अपना हाल होता ,जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता न मज़ा है दुश्मनी में, न है लुत्फ़ दोस्ती में कोई ग़ैर ग़ैर होता …

आफ़त की शोखियाँ है… तुम्हारी निगाह में …

आफ़त की शोखियाँ है… तुम्हारी निगाह में मेहशर के फ़ितने खेलते है , जलवा-गाह में वो दुश्मनी से देखते है, देखते तो है मैं शाद हूँ के, हूँ तो किसी …