Author: Kritika Bhatia

गोदी

जब कभी, आँख लगती थी मेरी, मै, सो जाती थी | क्या पता, क्या हो जाता था मुझे, दिल-ही-दिल मे, घबरा जाती थी |   आंसू, बहते थे आँखों से, तेरे पल्लू से, पोछ  देती थी उसे |   गोदी, मे सो जाती थी मै, लोरी, को सुनती थी मै | …

इश्क की धुन

इश्क की धुन, रोझ जगाये, गेह्र्र्र्र्री नीन्द को भी, येह झट से भगाये. येह धुन है मीठी, शह्द जैसी, जो कोई इसे सुन्ता है, वो अप्ने मन मे केह्ता है. “वाह, क्या धुन है, इस धुन को बजने देना सदा, कभी भी इस धुन को, बन्द न होने देना.” अगर हो किसे, कोई दुख या परेशानी, वो इस धुन को सुनकर, भूल जाये ये दर्द भरी झिन्दगी. खुश रेह्ने के लिए, है अलग-अलग रास्ते, येह धुन तुम्हे उस रास्ते पर ले जाएगा, जहा तुम्हे मिलेगी हर काम मे सफलता.