Author: Krishan saini

पद्मश्री नारायण दास जी को मेरी श्रदांजलि

प्रेम पूरित वो हाथ, और प्यारे से वो चरण। आप चले प्रभु छोड़, अब कौन देगा हमे शरण। आप थे माता-पिता, सबकुछ आपमे दिखता था। सब का भाग्य हे …

प्रीत

लिखबो पढ़बो आयो,बैठ्यो थारे संग। भैजा रै सगळे भेदा,और निकळगी जंग। लेखणी नै माण मिल्यो,स्वम मिल्यो छै प्रीत। कृष्ण ळिख अर्चणा करै,गाता रहो थै गीत। ✍कृष्ण सैनी(विराटनगर) 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 मेरी …

दीपावली

रावण मार के घर को आये,खुशी हुई बड़ी भारी…. दीप जलाके मने दीवाली,फैल रही उजियाली… मात कैकई वर मांगा था,राम जाये वन को… सुन माँ की इच्छा खातिर,छोड़ दिया …

प्रेम-रंग………………कृष्ण सैनी

जुल्फे जब उसकी उड़ती काली… मदपुरित मदिरा सी भरती हरीयाली… आलिंगन और स्पर्श अलौकिक… तुच्छ न्यून और सुख भौतिक… ज्ञान. धर्म, मर्म, वह सब… दैनिक द्वंद मिटाती जैसे रब …

प्यार दिखा के गौरी तुमने

प्यार दिखा के गौरी तुमने शमशीर मेरे चुबो दिया… सबकुछ छोड-छाड के संग मे मै तो तेरे आया था देगी ऐसी दगा तु मुझको कभी नही भरमाया था जिस …

यह रचना “बेटियाँ” प्रतियोगिता में सम्मलित की गयी है।

“माँ मैने क्या कसूर किया” नामक शीर्षक से प्रकाशित मेरे द्वारा रचित रचना http://sahityapedia.com प्रतियोगिता में शामिल है |अतः आपसे अनुरोध है | यदि आपको मेरी रचना पसंद आये …

श्रवण कुमार

ऋषि शांतनु का बेटा वह नाम श्रवण कुमार था माँ-बाप की खातिर जिसने कर दिया जीवन कुर्बान था दृष्टिहीन मात-पिता थे उसके वही एक सहारा था माता-पिता की आज्ञा …

आज हम नववर्ष बनायेंगे

आज हम नववर्ष मनायेंगे खूब पार्टी मे पैसा उडायेंगे दारू मांस मछली और अंडा जी भर कर खायेंगे भारतीय संस्कृति को आज रखेल बनायेंगे आज हम नववर्ष मनायेंगे माँ …

जग मे मिलेगा बहुत ही मान

अरे नादान तु क्यो हो रहा है हैवान तुझे क्या चाहिये अब तो बन तु इंसान पाप-पुण्य का ज्ञान नही तुझे मानुष होकर हुआ बेईमान जीवन व्यर्थ गवाया तूने …