Author: kiran kapur gulati

हक़ीक़त की दुनिया

वो ख़्वाबों की दुनिया ख्यालों की दुनिया परे है बहुत हक़ीक़त  की दुनिया ख्वाबों में पाया कि दुनिया हमारी कहती है हक़ीक़त जुदा ही कहानी काश कि ख़्वाब हक़ीक़त …

बेगाना नहीं

नाज़ुक था  दिल फूलों से भी ज़्यादा  मगर ज़ालिम ज़माने ने यह जाना नहीं बचाना चाहा था लाख  हमने मगर छलनी जिसने किया वो था कोइ अपना बेगाना नहीं

धुँधलका यादों का

धुंधलका यादों का धुंधलका यादों का छटने लगा है जैसे पर्दा सा कोई उठने लगा है हैं बीती बातें जाने कितनी पुरानी परत दर परत सब खुलने लगा है …

धुनधलका यादों का

धुंधलका यादों का धुंधलका यादों का छटने लगा है जैसे पर्दा सा कोई उठने लगा है हैं बीती बातें जाने कितनी  पुरानी परत दर परत सब खुलने लगा है …

क्या है सच और झूठा क्या है

तेरे  चरणों में जब आती हूँ मैं चैन मन का पाती हूँ दुनिया मनभावन लाख सही भरोसा इस पर ज़रा नहीं रंग हैं  इसके बड़े निराले तन को मन …