Author: kiran kapur gulati

क्या है सच और झूठा क्या है

तेरे  चरणों में जब आती हूँ मैं चैन मन का पाती हूँ दुनिया मनभावन लाख सही भरोसा इस पर ज़रा नहीं रंग हैं  इसके बड़े निराले तन को मन …

दौड़

सदियों से चल रही इक अजीब दौड़ है छूट जाता है कभी कहीं कुछ कभी ख़्वाहिशों के दौर  हैं नहीं थमता यह वक़्त कभी साँस हर पल चलती है ख़ुशनुमा होते …

हक़ीक़त हमारी

हम हैं क्या , और  है क्या हक़ीक़त हमारी जुड़ती हैं जब लकीरें आकार  बन जाते हैं सूर्य की किरणों में जैसे रंग ढल  जाते हैं रंगों और आकारों  की  दुनिया …

हे सूर्य यह दुनिया तो है तेरी दास

माना जग में राज है तेरा सब पर रौब जमाते हो सोऊँ जब. सुंदर सपनों में आकर तुम जगाते हो जग सारे से है रिश्ता तेरा हिस्सा उसमें है …

अजब ज़िन्दगी है गजब है कहानी

अद्भुत वादियों के नज़ारों को देख खो गयी थी मैं ओढ़ के चाँद तारों की चादर सो गयी थी मैं देख लाली आसमानों की विभोर हो गयी थी मैं …

कोई बात पुरानी याद आयी

ठंडी हवा के झोंकों सी इक अद्भुत कहानी याद आयी बैठे तारों की छांव में कोई बात पुरानी याद आयी महकती थी रात की रानी वो रात सुहानी याद …

माला शब्दों. की

कैसे. कान्हा. तुझे प्यार. करूँ है माला शब्दों की जिससे मैं. श्रृंगगर करूँ देखूं तुझको तो तेरे नयनों में मैं खो जाऊं देख प्यारा मुखड़ा तेरा शब्दों में उलझ …

है तुम्हारा मेल बहुत

कांच को हीरा. समझती रही पथरों से ही झोली भर्ती रही उलझ दुनिआ के रंगों में डूबती रही उभरती रही दामन में मोती डाले तूने मोल समझ न पाई …

न करो

रेगिस्तान में फूलों की तमन्ना न करो गिरती दीवारों. के तले आशियाँ न करो वीरान वादियों में बहारों की तमन्ना न करो सहरअं में बहें. झरने , ऐसी फ़िज़ूल …