Author: kiran kapur gulati

जवाब नहीं होता

कई बार कुछ बातों का जवाब नहीं होता उठते हैं जब तूफ़ाँ आँधियोँ का हिसाब नहीं होता बढ़ जाती हैं कभी बेचैनियाँ तो प्रभु शरण बिना, रास्ता कोई और …

उडा़नो को हम ढूँढते हैं

न जाने ज़िन्दगी में हम क्या ढूँढते हैं बहारों का हर पल पता ढूँढते हैं कैसी अजब कश्मकश है यह पर नहीं हैं लेकिन,उड़ानों को ढूँढते हैं नहीं चलता …

मुस्कुराहटें

नहीं मुस्कुराहटों का कोई जवाब छिपें हैं इनमें हजा़रों राज़ चली आती हैं कभी नम आँखों के साथ कभी थम जाती हैं शर्मो हया के साथ चहक जाती हैं …

अद्भुत रंग बिरंगे धागे

ये अद्भुत रंग बिरंगे धागे खींचें मुझे और लेकर भागें है हर रंग निराला इनका कामनाओं से भी हैं भरपूर है सतरगीं दुनिया ये सारी कभी उभारे कभी कर …

एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हजा़र

किरन कपूर गुलाटी एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार हँसाए कभी तो
 कभी रुलाये ज़ार ज़ार
 समझना तुझे आसान नहीं कहीं होती है रुखसत 
तो कहीं लाती है बहार
 दिखाती …

अपना बेगाना

दिल नाज़ुक था फूलों से भी ज़्यादा मगर जा़लिम ज़माने ने कभी यह जाना नहीं बचाना चाहा था लाख हमने मगर छलनी जिसने किया था कोई अपना बेगा़ना नहीं

हक़ीक़त की दुनिया

वो ख़्वाबों की दुनिया ख्यालों की दुनिया परे है बहुत हक़ीक़त  की दुनिया ख्वाबों में पाया कि दुनिया हमारी कहती है हक़ीक़त जुदा ही कहानी काश कि ख़्वाब हक़ीक़त …

बेगाना नहीं

नाज़ुक था  दिल फूलों से भी ज़्यादा  मगर ज़ालिम ज़माने ने यह जाना नहीं बचाना चाहा था लाख  हमने मगर छलनी जिसने किया वो था कोइ अपना बेगाना नहीं