Author: KaviKrishiv

‘मेरी बेटी’ – कविकृशिव

मेरी  बेटी  मुझसे  है  कहती,   काश  मैं  एक  तितली  होती रंग  बिरंगे  पंखो  के  संग,    मैं  भी   घर  से  निकली  होती फूलो  पर  इठलाती  इतराती,   पत्तो  पर  से  फिसली  …