Author: Rina Baghele

ख़्वाब

“ख्वाब” एक ख्वाब अधूरा सा, ख्वाब पूरा ख्वाबों में है। तिन वर्षो से है प्रयत्न, हार हर वक्त हातों में है। डगमगाता है जब विश्वास यहाँ, तब डगमगाते हम …