Author: Ajay Kumar Mallah "Karuna"

अंजाम-ए-वफ़ा – अजय कुमार मल्लाह

हमको तो अंजाम-ए-वफ़ा ख़ूब है मालूम। हम इश्क़ निगाहों में अब पलने नहीं देंगे।। एवज़ में मोहब्बत के लोग देते हैं कज़ा। परवाने को फ़ानूस में जलने नहीं देंगे।। …

मुझको छोड़ के – अजय कुमार मल्लाह

मैं तलाशती रही इस सवाल का जवाब, कि क्यूं तोड़ गया वो मेरा हर ख़्वाब, हर पल भगवान से मांगा जिसे हाथ जोड़ के, वो चला गया क्यूं अकेला …

मिट्टी का खिलौना हूँ – अजय कुमार मल्लाह

मिट्टी का खिलौना है जिस्म लोगों की नज़र में, अब तो लगता नहीं अपना कोई भी इस शहर में, पता पूछती फिरती हूँ कोई बता दे मौत का, फांसी …

उलझन – अजय कुमार मल्लाह

मैं तो लड़खड़ाता हूँ तु चलता चाल में होगा, नहीं मालूम है मुझको तु किस हाल में होगा। सपने जागती आँखों से देखने की आदत है, सोचता हूँ कि …

वो मुझमें रहती है – अजय कुमार मल्लाह

कल ख़्वाब में मिली मुझसे तो कह रही थी वो, मेरी कुछ हरकतों से आजकल नाराज़ रहती है। मेरा यूं भीगना बरसात में अच्छा नहीं लगता, उसकी तबियत कई …

मै गुनहगार हो गया हूँ – अजय कुमार मल्लाह

समझ के खिलौना तोड़ा दिल, अब मै बेकार हो गया हूँ, सज़ा मोहब्बत की मिल रही है, मै गुनहगार हो गया हूँ।, हर सितम शौक से सहने को, मै …

तेरी याद में – अजय कुमार मल्लाह

हक़ीक़त से अलग होती है ख़्वाबों की दुनिया, मैं हर ख़्वाब में तुझसे मुलाक़ातें करता हूँ। मेरे सब दोस्त कहते हैं मैं हो गया हूँ पागल, जब आजकल तेरी …

तुझे पाने की ख़ातिर – अजय कुमार मल्लाह

तुझे खोकर अरमां दफन करना नहीं आया, तेरी खातिर सब रिश्तों से बगावत कर ली। सितारों की भीड़ मे था चाँद को चुना मैंने, पूरे वादे कर दिए और …

तेरा नाम लिख दिया है – अजय कुमार मल्लाह

जहालत नहीं साबित की लिखकर कभी मीनारों पे, अक्सर मिटा देती हैं लहरें लिखे हुए नाम किनारों पे, मेरी नज़र में इससे महफूज जगह नहीं है “करुणा”, तेरा नाम …

वो मेरी नही है – अजय कुमार मल्लाह

मेरे दोस्त तेरा कहना है कि वो मेरी नही है, आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है। देख! देख रही है उसकी तस्वीर भी मेरी तरफ़, …

तेरा नाम मेरी तक़दीर से – अजय कुमार मल्लाह

मुझपर क्यूं इतना सितम ढाए जा रही है ज़िन्दगी, तेरा नाम मेरी तक़दीर से, मिटाए जा रही है ज़िन्दगी। मौत से पहले ना तुझको मैं भुला बैठूँ, इसलिए हर …

दीवानगी – अजय कुमार मल्लाह

अपने हाथों से अपनी ज़िन्दगी तबाह करता हूँ, मैं जानबूझ कर हर बार यही गुनाह करता हूँ। बहुत मुश्किल है तेरा ख़्याल अपने ज़हन से मिटाना, तुझे ही देखता …

जवाब – दोस्त के सवाल का – अजय कुमार मल्लाह

मेरा एक दोस्त कहता है —— कि वो कैसे तुझपे इतने सितम ढा सकती है, तुझे यूं रुलाकर खुद मुस्कुरा सकती है, कितना प्यार करता है तु उससे आज …

दुनिया होगी तेरे साथ – अजय कुमार मल्लाह

ये सिलसिले सितम के तुझपर कम नहीं होंगे, कल दुनिया होगी तेरे साथ पर हम नहीं होंगे। इन राहों पे चल रही है तो तु तन्हा ही चलेगी, ये …

दो मुक्तक – अजय कुमार मल्लाह

समझ में कुछ नहीं आता समझदारी भी ऐसी है, उसके एहसान से ज़िन्दा हूँ खुद्दारी भी ऐसी है, मेरा ये रोग मुझको तो लाइलाज लगता है, दवा करती नहीं …

प्यार तुझसे ही करता हूँ – अजय कुमार मल्लाह

मौत का डर नहीं मुझको, मैं ज़माने से डरता हूँ, प्यार तुझसे ही करता था, प्यार तुझसे ही करता हूँ। सोचा कि इत्तला कर दूं, अब भी तुझपे ही …

तुझे मेरी याद आएगी – अजय कुमार मल्लाह

जब रिश्तों की खूबसूरती तेरे लिए बदल जाएगी, जब भीड़ में खड़ी अकेली तु पछताएगी, तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी। आँसुओं की सेज पर तु बैठकर …

ये तुम नहीं समझोगी – अजय कुमार मल्लाह

वो क्या जानेंगे जो पा लेते हैं, जानते तो वो हैं जो खो देते हैं। ये तुम नहीं समझोगी तुमने खोया ही क्या है, जो चाहा था तुम्हारे दिल …

मुझसे झूठा प्यार. . . अजय कुमार मल्लाह

तु समझती रही मजाक हर जज़्बात को मेरे, मै आख़िर क्यूँ नहीं समझा इन इरादों को तेरे, यूँ दूरियाँ बरक़रार, रखने का शुक्रिया, मुझसे झूठा प्यार, करने का शुक्रिया…….. …

कब तक रोऊँगी मैं – अजय कुमार मल्लाह

ज़िन्दगी का ये सफर तेरे बिन भी गुज़र जाएगा, कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा। किसी दिन भड़केगी दिल में आग, सब जल के खाक …

इजाज़त चाहता हूँ – अजय कुमार मल्लाह

अब पीता हूँ शराब मै हो गया हूँ खराब, कुछ सवाल हैं ज़हन में जिनके ना मिले जवाब, कोई आए तो सही, करना शिकायत चाहता हूँ, इस जहां को …

मेरे हाथ लगी तन्हाई – अजय कुमार मल्लाह

दिल की किताब पे चली, वो स्याही थी प्यार की, मेरे हाथ लगी तन्हाई, और तस्वीर यार की। उसके सामने बैठूँ तो आँखें ना झुके, उसे देखता जाऊँ मै …

ज़िन्दाबाद – अजय कुमार मल्लाह

तु काटता है सिर जिहाद के लिए, ज़िन्दगियाँ बाँटता हूँ मैं ज़िन्दाबाद के लिए। फिज़ूल तेरे खून की रवानी है क़ातिल, अपने भाई मारता है तुझ सा नहीं जाहिल, …