Author: कपिल जैन

पिता महान होते है

चिरैया चहकती फूल हँसते पत्ते खिलते सूरज निकलता बच्चे जगते आगंन मे खेलते मुट्ठी में दिन आंखों में सपने होते पिता जब साथ होते चिड़ियाँ चीखती फूल चिढ़ाते पत्ते …

मैं प्यासी हुं ” नदी “

एक दशक से बेठी मौन जलधारा के प्रवाह से नदी उफनती मेघ मल्लाहरो़ से बतियाती किनारों से कहती है मैं प्यासी हूँ किनारे नहीं सुनते मेरी… हमेशा की तरह …