Author: कपिल जैन

प्रेम दिवस

लो फिर आया ये प्रेम दिवस प्रदर्शन का अनोखा दिवस सच अगर प्रेम दिवस है ये, तो प्रदर्शन की क्या आवश्यकता अंतर्मन की नैससर्गिक भावना को किसी सहारे की …

मैं रोज लगाता हूँ एक साँकल अपने ख्वाबों की दुनिया पर… फिर भी जाने कैसे किवाड़ खुले मिलते हैं… बेशक चरमराने की आवाज़ रोज होती है वाकिफ और कर देता हूँ बंद हर दरवाज़े …

ख्वाहिश

यूं तिनकों सी बिखरी मेरी ख्वाहिश खूबसूरत रात की दास्ताँ कहती है तेरे जाने के बाद भी पहरों तक मेरे लबों पे इक जुम्बिश रहती है केशुओं में तेरी …

सुनो चाँद, कल ना…. काला टीका लगा कर आना

बारिश में न रात जल्दी आ जाया करती है दुकान से घर लौटते वक़्त अँधेरा हो जाता है सड़क पर चारो तरफ भीड़ … ट्रैफिक का शोर…. तकरीबन पन्द्रह …

~~ प्रेम ~~

समय की सिलवटों में मेरे प्यार की सीवन नहीं उधड़ी है समय-समय पर मिल कर हम ने उसकी सिलाई पक्की की है। फर्क बस इतना है कि उसे जताने …

शायद…..

शायद इस जिंदगी में एक ऐसा दिन भी आएगा जब हम एक दूसरे के साथ हँस सकेंगे कुछ पुराने किस्से याद करके मैं तुम्हें चिढ़ा सकूंगा कुछ पुराने गाने …

जीने के लिए ये जरूरी है भ्रम

सुनो मेरा ये भरम रहने दो कि तुम हो मेरे जीने के लिए ये जरूरी है. मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा कांधा. तुम्हारा सीना. तुम्हारा रुमाल. या कि तुम्हारे शब्द.. …

मजबूर

    जो सर सरहद पर न झुका उस सर को कुचल ते देखा…. जिन हाथों को दुश्मन के गले दबाते देखा उन हाथों को मज़बूरी में जुड़ते देखा …

★ उत्तम क्षमा ★

अहंकार त्यागता है क्षमा सुसंस्कार पालता है क्षमा शीलवान का शस्त्र है क्षमा अहिंसक का अस्त्र है क्षमा प्रेम का परिधान है क्षमा विश्वास का विधान है क्षमा सृजन …