Author: kajal

जरा रुक…..

चलते चलते ऐ! मुसाफिर पीछे मुड़कर तो देख कहाँ ले जायेगा तेरा ये सुख सफर में ना तूने दिया किसी को सुख फिर अपने लिए क्यों ढूंढता है तू …

मैं सबला

कैसी है पहेली जानू ना अकेली यह कैसी बेबसी रे पास ना आ सकु रे कोना कोना तेरा अहसास दिलाये हर क्षण तेरा प्यार ये मुझे बुलाये तेरी जगह …

दे तो ये दे ( जो सच्चे देश भक्त है जरूर पढ़े )

कुछ क्षणों को मैं बदलूँ रब मुझे वो शक्ति ना दे मेरे प्यार को पा लूँ रब मुझे वो सुंदरता ना दे सारे संसार को खरीद लूँ रब मुझे …

आगे बढ़ो

अपनी सोंच को उड़ने ना दे वही आत्मनियंत्रण है अपने विश्वास को खोने ना दे वही आत्मविश्वास है अपने सच को छुपने ना दे वही तो हरिश्चंद्र की परछाई …

कोशिश

तुझे यादों से मिटाने की कोशिश मेरे होंठो पे तेरा नाम ना लाने की कोशिश पर्वत की ऊंचाई से केवल तुझे देखने की कोशिश आसमान के तारों में तुझे …

आँसू

मुझे ना निकाल मै ही तो साथी तेरा जब जब तूमने मुझे निकाला दुनिया ने तुझे ठुकराया मुझे छुपने दे ह्रदय में तेरे यूँ आँखों से बाहर जाने का …

होले से

मेरी चूड़ी जब खनकती खनक में मधम सी तेरी आवाज़ आती पलकें जो होले से झुकती तस्वीर तेरी नज़र आती होंठो पर मीठी मुस्कान आती मधुर याद तेरी ही …

“मैं”

मैंने “मैं” से किया सवाल तू कहाँ है बता ? “मैं” ने हस कर कहा “इंसान की पहली तरक्की से उसकी चिता तक जाने का रास्ता मैं ही तो …

दुरी

कभी आवाज़ सुनने को तरसते है तो कभी उन्हें देखने को तरसते है ये सोंच के परेशान है इस वक़्त वो क्या करते है वो खिलते है या हसते …

बेटी

कहती है – माँ लिख तू मुझ पे कविता क्या लिखू ,कैसे लिखू , तू ही तो है प्रेरणा मेरी। हसती है ,झूमती है,खुशियों से चहकती है कैसे कहु, …