Author: Kailash Pareek Khandela

होरी खेलें श्याम सुजन

होरी खेले श्याम सुजान, प्यारी राधे रानी संग । ग्वाल बाल बृजबाला झूमें, बजा बजा कर चंग ।। भर पिचकारी रँग सखी डारो,गोरी-गोरी राधा कृष्णा कारो। श्यामा श्याम छैल …

मोहन खेल रहे हैं होरी / शिवदीन राम जोशी

मोहन खेल रहे है होरी । गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य धन्य यह होरी ।। वो गुलाल राधे ले आई, मन मोहन पर ही बरसाई । नन्दलाल भी …

रे रंग डारि दियो राधा पर /शिवदीन राम जोशी

रे रंग डारि दियो राधा पर, प्यारा प्रेमी कृष्ण गोपाल । तन मन भीगा अंग अंग भीगा, राधा हुई निहाल ।। रे… गोप्यां रंग रंगीली रंग में, ग्वाल सखा …

सुधि मोरी काहे बिसराई नाथ /शिवदीन राम जोशी

सुधि मारी काहे बिसराई नाथ । बहुत भये दिन तड़फत हमको, तड़फ तड़फ तड़फात । अब तो आन उबारो नैया, अपने कर गहो हाथ । अवगुन हम में, सब …

कुञ्ज गलिन में कुंज बिहारी

कुञ्ज  गलिन में कुंजबिहारी । घूम रहे थे झूम रहे थे संग में थी श्री राधा प्यारी । ललिता और बिसाखा दौड़ी युगल स्वरूप मनोहर जोड़ी, कृष्ण राधिका को …

गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता

शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता वेद  पुराण गुरु  छवूँ शास्तर, राम रामायण सत्य है नाता । गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु श्रुति …

न भूल सके इतने / शिवदीन राम जोशी

मो मन माहीं बसे मन मोहन,और बसी मन राधिका रानी, नन्द यशोमती कौन बिसारत, गुवालन की छबि नाहीं भुलानी | बृज की बृजबाल वे गुजरियां, अहो! कृष्ण के संग …

आई शुभ वसंत / शिवदीन राम जोशी

आनन्द-उमंग रंग, भक्ति-रंग रंग रंगी, एहो ! अनुराग सत्य उर में जगावनी | ज्ञान वैराग्य वृक्ष लता पता चारों फल, प्रेम पुष्प वाटिका सुन्दर सजवानी | सत्संगी समझदार, देखो …

मन है मन का सकल बखेरा / शिवदीन राम जोशी

मन है, मन का सकल बखेरा | मन लग जाये भक्ति करन में,सोचूं साँझ सवेरा || मन माने माने ना कहना, पागल मन के संग में रहना | है …

ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूँ / शिवदीन राम जोशी

नित्त ध्यान धरूं चित्त से हित से, उर गोविन्द के गुण गाया करूँ | वृंदावन  धाम  में  श्याम  सखा,  मन  ही  मन  में  हरषाया   करूँ | नन्द  यशोमती …

बरसत बरषा परम सुहावन / शिवदीन राम जोशी

बरसत बरषा परम सुहावन । रिमझिम रिमझिम बरस रहा है,ये आया सखि सावन ॥ बादर उमड़ी घुमड़ी सखि छाये, दादुर  कोयल गीत सुनाये । नांचत मोर पिहूँ पी रटि रटि, मौसम सुन्दर …

ना सखी श्याम हमारे कहे को / शिवदीन राम जोशी

थाकी गई यसुधा समुझा, हम बरज थकी, सब राम ही जाने | ओलमू लावत नन्द को नंदन, छेर करे री रह्यो नहीं छाने | गुवालनी ढीठ वे गारी बकैं, …

मन अब तो जाग / शिवदीन राम जोशी

सांकल  ज्ञान  की  तौरत  है  गजराज  यो  धूम  मचावत  है | अहिराज तुरंग कहूँ  क्या  कहूँ  धमकावें  तो  मारने  धावत  है | शिवदीन कहें बस क्या  चलि हैं  पल …

क्या जमाना आगया / शिवदीन राम जोशी

करते संसार  में  बारूद  बिछी, कब  आग लग  जाए | भडाका एक ही होगा, किसे अब कौन समझाए || देश में  नेता ना  कोई  काम करते हैं | कुर्सियों …

रंग बरसत ब्रज में होरी का / शिवदीन राम जोशी

<divरंग बरसत ब्रज में होरी का | बरसाने की मस्त गुजरिया, नखरा वृषभानु  किशोरी का || गुवाल  बाल  नन्दलाल  अनुठा, वादा  करे सब  से  झूठा  | माखन चोर  रसिक  मन …

मिहरा बरसत वृन्दावन में / शिवदीन राम जोशी

मिहरा बरसत वृन्दावन में | तन  राधा  का  मस्त  लहरिया, भीगा  मन  मोहन  में || छम-छम छम-छम पायल बाजे, चलत चाल श्रीराधे साजे | धन्य-धन्य श्रीकृष्ण कलाधर शोभित शुभ …