Author: Inder Bhole Nath

ये गुनाह करते हैं…

कभी खामोश तो कभी बयां करते हैं, बे-वजह दिल को युं परेशां करते हैं, जन्नत-ए-इश्क के मुकाम ने हमें तबाह कर दिया फिर भी न जाने क्युं ये गुनाह …

लाचारी ये कैसी…

भटकें हैं ऐसे होके दर-बदर यूँ राह-ए-उल्फत में इंदर, अवारी ये कैसी सुलगते हैं दिल में अरमान लाखों है हर लम्हा अब, बेकरारी ये कैसी  न अक्स रहा वो …

ख़ौफज़दा दिल…

बड़ा ही ख़ौफज़दा है दिल,इन फरेबी हुक्मरानों से, हयात-ए-आबरू लूटते देखा,अपने ही पासबानों से… …इंदर भोले नाथ… ख़ौफज़दा-डरा हुआ फरेबी- झूठा हुक्मरानों- नियम बनाने वाले हयात- जीवन आबरू- मर्यादा …

बर्बादी का अंजाम लिख दिया…

किसी ने जख्म तो किसी ने आसुओं का ज़ाम लिख दिया, किसी ने रुसवाई तो किसी ने दर्द का पैगाम लिख दिया, राह-ए-उल्फ़त मे मोहब्बत को नजाने कितने नाम …

कहीं डूबा है कोई यादों मे…

कहीं जख्म है नासूर बनें,कहीं समंदर बसा है आँखों मे, कहीं तन्हा हुआ सा है कोई,कहीं सुलग रहा कोई रातों मे… कुछ इस क़दर बेताब हुए, दीवानें राह-ए-उल्फ़त मे, …

वीरानो में बना बैठे हैं…

कम्बख़्त ये तन्हाई भी न कुछ इस क़दर हमें अपना बना बैठी है, के इसका बसेरा मुझमे नहीं, हम अपना आशियाना ही वीरानो में बना बैठे हैं… …इंदर भोले …

मिट्टी के घरौंदे…IBN

उसकी हर एक बूँद से पिघलते देखा है मैने मिट्टी के उन घरौंदों को… जिस बरसात की आरज़ू पत्थरों के महल हर रोज किया करते हैं….. …इंदर भोले नाथ… …

अब ज़िंदगी संवर जाने दे…

ऐ-वक़्त है गुज़ारिश अब निखर जाने दे गमों की इन आँधियों को अब गुजर जाने दे ख्वाहिश सदियों की तुझसे,रखता नहीं है “इंदर” चन्द लम्हों मे ही सही,अब ज़िंदगी …