Author: Hitesh Kumar Sharma

बारिश की बूँदों में

सूखी धरा हरी भरी हुई बारिश की बूँदों में प्रकृति की हुई छट्ठा नयी बारिश की बूँदों में नीलगगन पर श्यामल घटा बारिश की बूँदों में धरती से धूल …

बिहार में बंद मधुशाला (हास्य )

बिहार में बंद हुई मधुशाला नितीश जी ये आपने क्या कर डाला बिहार में क्यों बंद की मधुशाला रोज़ शाम को वो मधुशाला में मिलना मदहोशी के आलम में …

अंजाम क्या होगा (ग़ज़ल)

इस बेनाम चाहत का न जाने अंजाम क्या होगा बैचैन दिल को जो सुकून देगा उसका नाम क्या होगा निगाहें ढूंढती हैं हरपल उस हमसफ़र को कहीं मिल वो …

सच मेरा ख्वाब हो जाये (ग़ज़ल)

खुदा कसम अगर वो बेनकाब हो जाये बरसो पुराना सच मेरा ख्वाब हो जाये एक बार जो छू ले वो बहते दरिया का पानी तो सारे के सारे समंदर …

कलयुग के भगवान

मैं तो सिर्फ तुमे ही मानता महान तुम तो ठहरे कलयुग के भगवान तुम्हारी ताकत का है मुझे अंदाज़ा अपने क्षेत्र के तुम हो राजा अपने घर भी तुमने …

तुम्हारा बन जाऊँगा (ग़ज़ल)

तू एक बार बुलाकर तो देख, तुम्हारा बन जाऊंगा हो नज़र तो तेरी आसमान पर, तो सितारा बन जाऊंगा तुझसे मिलने की आरज़ यूं ही कब तक रहेगी अधूरी …

तेरे दर का रास्ता

तुझे पाने का रास्ता कहाँ से जाता है हर रास्ता मंदिर मस्जिद के बीच टकराता है इंसान बंटा अब यहा सिर्फ मजहबो में इंसानियत का मजहब अब कौन निभाता …

शुभ नव वर्ष

नव- प्रभात, नव-दिवस, , नव -वर्ष शरद ऋतू ,वसुंधरा की छटा निराली मन मयूर प्रफुल्लित करती शीतल पवन कलरव करते पक्षी , फैली चहुँ ओर हरियाली श्यामल श्वेत बदली …