Author: Harendrra Pandit

एक प्रेयसी की बात

एक प्रेयसी की बात __________________ ख़ामोशी से मेरे बातो को पढ़ते गए छुपा छुपा के सब से… सुनते गए आवाज़ों को मेरी एक मुस्कुराहट होठों के पीछे छुपा कर…. …

मैं

“मैं जो हूँ ,सो हूँ… क्या पर्दा तुमसे करूँ!! नहीं ऊंच नीच का ज्ञान मुझे, न जात मज़हब का भान मुझे, फ़र्क न जानू बड़े छोटे का, कहूँ क्या …

कलम दम तोड़ती है

“कलम दम तोड़ती है” ——————– “लिखती है कलम कागज़ के पन्नों को चूम के बरसाती है स्याही मोहब्बत में कोरे कागज़ पर झूम के, अज़नबी अहसासों से हर हर्फ़ …